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संघर्ष

हरियाणा में किसान आंदोलन को मिली कामयाबी, अब देश भर गूंजेगा MSP का मुद्दा

सूरजमुखी पर MSP और किसान नेताओं की रिहाई के मुद्दे पर प्रशासन से सहमति बनने के बाद पीपली आंदोलन समाप्त

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मांगों पर सहमति बनने के बाद जश्न मनाते आंदोलनकारी किसान

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सूरजमुखी की खरीद और जेल में बंद किसान नेताओं की रिहाई को लेकर हरियाणा के पीपली (कुरुक्षेत्र) में चल रहा किसान आंदोलन मंगलवार रात समाप्त हो गया। दोनों मांगों पर प्रशासन के साथ सहमति बनने के बाद किसान नेताओं ने धरना समाप्त कर हाईवे खोलने का ऐलान किया। बुधवार शाम तक गुरनाम सिंह चढूनी समेत 9 किसान नेताओं की रिहाई हो सकती है।

देश भर में लड़ी जाएगी MSP की लड़ाई: राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार ने हमारी मांगें मान ली हैं। किसानों को MSP मिलेगा। हमारे नेताओं को जल्द रिहा किया जाएगा और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस होंगे। राकेश टिकैत का कहना है कि हम वही रेट मांग रहे थे जिसकी बात देश के पीएम ने की थी। यह लड़ाई तो पीएम और सीएम के बीच थी। हम आगे भी MSP की लड़ाई पूरे देश में लड़ेंगे। जो केंद्र सरकार का रेट है वो सभी राज्यों में मिलना चाहिए। MSP की गारंटी के लिए देश में एक बड़े आंदोलन की जरूरत है।  

किसानों ने मनाया जश्न

किसानों की मांगों पर सहमति बनने के बाद आंदोलनकारियों ने धूमधाम से अपनी कामयाबी का जश्न मनाया। इस दौरान युवा और बुजुर्ग किसान खुशी से झूमते नजर आए और खूब आतिशबाजी की गई। सप्ताह भर तक चले आंदोलन के बाद किसानों को सूरजमुखी पर तय MSP मिलने और जेल से किसान नेताओं की रिहाई का रास्ता साफ हो गया। इससे किसान यूनियनों का मनोबल बढ़ेगा।

किसानों पर हुआ था लाठीचार्ज

सूरजमुखी पर तय MSP दिए जाने की मांग कर रहे किसानों पर गत 6 जून को हरियाणा के शाहबाद में पुलिस ने जमकर लाठीचार्ज किया था। इस दौरान किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़नी समेत सैकड़ों किसानों को हिरासत में लिया गया। इस घटना से किसान यूनियनों में काफी आक्रोश था। 12 जून को कुरुक्षेत्र के पीपली में किसान महापंचायत बुलाई गई। तब प्रशासन के साथ वार्ता विफल होने के बाद किसानों ने दिल्ली-जम्मू नेशनल हाईवे जाम कर दिया था। 13 जून को किसान नेताओं के साथ लंबी बातचीत के बाद आखिरकार सहमति बनी और किसानों ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया।

संयुक्त किसान मोर्चा ने संभाली थी कमान

शाहबाद में लाठीचार्ज के बाद गुरनाम सिंह चढूनी समेत सैकड़ों किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया था। पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में 12 जून को कुरूक्षेत्र के पीपली में किसान आंदोलन शुरू हुआ तो इसकी कमान संयुक्त किसान मोर्चा ने संभाली। किसानों द्वारा हाईवे जाम कर पक्का मोर्चा लगाने से वहां दिल्ली के सिंघु बॉर्डर जैसा माहौल बन गया था। इस आंदोलन की कामयाबी ने संयुक्त किसान मोर्चा में भी जान फूंंक दी है।

चढ़ूनी के लिए डटे टिकैत

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन के बाद संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) बिखर-सा गया था। लेकिन पीपली आंदोलन ने SKM में भी जान फूंक दी है। हरियाणा में किसान नेता गुरनाम सिह चढूनी की रिहाई के लिए राकेश टिकैत डटे रहे, इससे किसान यूनियनों में एकजुटता का संदेश गया। साथ ही दोनों खेमों के बीच मतभेद मिटाने में मदद मिल सकती है।

यह बनी सहमति

किसान नेताओं से वार्ता के बाद कुरुक्षेत्र के डिप्टी कमिश्नर शांतनु शर्मा ने कहा कि सूरजमुखी के लिए मुख्यमंत्री ने MSP बढ़ाने पर सहमति जताई है। हरियाणा सरकार फसल का उचित दाम दिलाएगी। इसके लिए चाहे दाम बढ़ाना पड़े या फिर भावांतर योजना के तहत भुगतान किया जाए।   

केंद्र सरकार ने सूरजमुखी के लिए 6400 रुपये प्रति कुंतल का MSP तय किया है। अभी तक हरियाणा में सूरजमुखी के लिए 4900 रुपये प्रति कुंतल के रेट के हिसाब से प्रति कुंतल 1000 रुपये का भावांतर भुगतान किया जाता है। किसानों की मांग को देखते हुए हरियाणा सरकार सूरजमुखी के लिए 5000 रुपये प्रति कुंतल का रेट तय कर 1400 रुपये का भुगतान भावांतर के तहत करेगी।

पीपली आंदोलन खत्म होने पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा, “सूरजमुखी पर देशभर में पहले से ही सबसे ज्यादा रेट दे रहे हैं। हमने किसानों के हित में पहले भी काम किया है और आगे भी काम करते रहेंगे।”

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