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उत्तराखंड के जंगलों में घूमना हुआ महंगा, गेस्ट हाउस का किराया बढ़ा, प्री-वेडिंग शूट का शुल्क 10 हजार

https://uttarakhandtourism.gov.in/
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उत्तराखंड के जंगलों में घूमना महंगा हो गया है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय पार्क, वन्यजीव विहार और संरक्षित क्षेत्रों में पर्यटकों के शुल्क की नई दरें लागू कर दी हैं। वन क्षेत्रों में प्रवेश से लेकर विश्राम गृहों में रुकना, वाहन, कैमरा, ड्रोन और फिल्मांकन आदि का शुल्क बढ़ाया गया है। इस बारे में 18 सितंबर को शासनादेश जारी हुआ था जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।

शासनादेश के अनुसार, कार्बेट टाइगर रिजर्व में भारतीय नागरिकों के लिए प्रवेश शुल्क 200 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये और राजाजी टाइगर रिजर्व में 150 से बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया है। कार्बेट टाइगर रिजर्व में दैनिक भ्रमण शुल्क 100 रुपये लिया जाता था जो अब 500 रुपये लगेगा। राजाजी टाईगर रिजर्व में दैनिक भ्रमण निशुल्क था, लेकिन अब वहां भी 150 रुपये दैनिक भ्रमण शुल्क देना होगा। दोनों टाइगर रिजर्व में हल्के वाहनों का प्रवेश शुल्क 500 रुपये से बढ़ाकर 700 रुपये कर दिया है। बाकी वाहनों के प्रवेश शुल्क में बढ़ोतरी हुई है।

गेस्ट हाउस का किराया 3000 रुपये तक बढ़ा

विभिन्न श्रेणियों के वन विश्राम गृहों के किराये में 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। सबसे महंगा खिनानौली, कार्बेट टाइगर रिजर्व स्थित वन विश्राम भवन में प्रीमियम श्रेणी का कमरा है, जिसका एक दिन का किराया 5000 था। इसे बढ़ाकर 8000 रुपये कर दिया। ढिकाला गेस्ट हाउस का किराया 2500 रुपये से बढ़कर 4000 रुपये हुआ। तराई पश्चिमी वन प्रभाग स्थित फाटो पर्यटन जोन में नवनिर्मित ट्री हाउस में भारतीय पर्यटकों के लिए 4,000 रुपये और विदेशी सैलानी के लिए 8,000 रुपये शुल्क लिया जाएगा। प्रदेश के बाकी वन विश्राम गृहों की दरों में भी बढ़ोतरी की गई है।

संरक्षित वन क्षेत्रों के अलावा वन प्रभागों में भी प्रवेश शुल्क  

अब तक संरक्षित वन क्षेत्रों को छोड़कर समस्त वन प्रभागों में निशुल्क प्रवेश था। लेकिन अब इन वन क्षेत्रों में भी भारतीय नागरिकों से 100 रुपये और विदेशी पर्यटकों से 200 रुपये प्रवेश शुल्क लिया जाएगा। नेचर पार्क, नेचर वॉक, बर्ड वाचिंग, इको ट्रेल, हर्बल गार्डन, सिटी पार्क आदि में भी पहले निशुल्क प्रवेश मिलता था, लेकिन अब भारतीय सैलानी को 50 रुपये और विदेशी सैलानी को 100 रुपये देने होंगे।

कैम्पिंग के चार्ज भी 250 रुपये तक बढ़े

वन क्षेत्रों के पर्यटन शुल्क में 50 से 100 फीसदी तक की बढ़ोतरी की गई है। इसके पीछे सरकार की मंशा वन क्षेत्रों में मौजूद सुविधाओं और इको-टूरिज्म से आय बढ़ाने की है। वन क्षेत्रों में कई नई चीजों पर भी शुल्क लगा दिया है। संरक्षित वन क्षेत्रों के बाहर वन क्षेत्र में कैंम्पिंग के चार्ज 50 रुपये से 250 रुपये तक बढ़े हैं।

ड्रोन से शूटिंग पडेगी महंगी

अभी तक संरक्षित क्षेत्रों में ड्रोन शूटिंग की अनुमति नहीं थी। लेकिन अब संरक्षित क्षेत्रों में ड्रोन से फिल्मांकन के लिए भारतीय से डॉक्यूमेंट्री का 10 हजार रुपये और फीचर फिल्म के लिए 50 हजार रुपये दैनिक शुल्क लिया जाएगा। अधिकांश शुल्क की दरें विदेशी नागरिकों के लिए भारतीय नागरिकों से कई गुना अधिक हैं। अभी तक वन क्षेत्रों में पर्यटकों से वर्ष 2009 के शासनादेश के अनुसार शुल्क लिए जाते थे। इनमें अब बदलाव किया गया है।

वेब सीरीज, प्री-वेडिंग शूट पर 10 हजार का शुल्क

प्रदेश के कंजर्वेशन रिजर्व में वेब सीरीज, कमर्शियल विज्ञापन और प्री-वेडिंग शूट के फिल्मांकन का अभी तक कोई शुल्क तय नहीं था। इसके लिए अब 10 हजार रुपये शुल्क देना होगा। साथ ही प्रति फिल्म 20 हजार रुपये की बंधक राशि देनी होगी। कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में कमर्शियल फोटोग्राफी का चार्ज 500 रुपये से बढ़कर 2000 रुपये किया गया है। इनके अलावा कई तरह के शुल्कों में बढ़ोतरी हुई है।

इन्हें मिलेगी रियायत

वन क्षेत्रों में पर्यटन से जुड़े शुल्क में बढ़ोतरी प्रदेश के सभी नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, कंजरवेशन रिजर्व समेत समस्त वन क्षेत्रों में मौजूद पर्यटन सुविधाओं और सेवाओं पर लागू होगी। हालांकि, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों को पार्क प्रवेश शुल्क, कंडक्टेड बस ट्रिप, हाथी सवारी, डोरमेट्री शुल्क, संग्रहालय प्रवेश शुल्क में 50 फीसदी की छूट होगी। 18 साल तक के विद्यार्थियों से एक चौथाई शुल्क ही लिया जाएगा। 12 साल तक के बच्चों को निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा।

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