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पर्यावरण

देर से आया मानसून, देश भर में जल्दी पहुंचा, लेकिन कई राज्यों में कम बारिश

पूर्वी राजस्थान में सामान्य से 287 फीसदी अधिक बारिश हुई तो मराठवाड़ा में सामान्य से 69 फीसदी कम बारिश है।

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इस साल मानसून ने बहुत तेजी से पूरे देश को कवर किया है। एक जून की बजाय 8 जून को केरल पहुंचा मानसून, धीमी गति से आगे बढ़ रहा था। लेकिन पिछले एक सप्ताह में मानसून देश के अधिकांश इलाकों तक पहुंच गया है। आमतौर पर ऐसा 8 जुलाई तक होता है। पिछले सप्ताह देश के बड़े भू-भाग में हुई बारिश से औसत बारिश का अंतर घटकर सिर्फ 10 फीसदी रह गया है। इससे खरीफ की बुवाई में तेजी आएगी। लेकिन देश के कई राज्य बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। यही वजह है कि धान की बुवाई पिछले साल से 26 फीसदी कम हुई है।

1 जून से शुरू चार माह के मानसून सीजन का एक महीना गुजर चुका है। इस दौरान 30 जून तक देश में सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश हुई है। उत्तर पश्चिम भारत में सामान्य से 48 फीसदी अधिक बारिश हुई जबकि दक्षिण भारत में सामान्य से 45 फीसदी कम बारिश हुई। मध्य भारत में सामान्य से 6 फीसदी और पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत में 18 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। कुल मिलाकर मानसून की जो तस्वीर उभर रही है, वह राहत तो देती है लेकिन बारिश का असमान वितरण मुश्किलें पैदा कर सकता है। पूर्वी राजस्थान में सामान्य से 287 फीसदी अधिक बारिश हुई तो मराठवाडा में सामान्य से 69 फीसदी कम बारिश है।

मौसम विभाग ने जुलाई में सामान्य बारिश की उम्मीद जताते हुए इस साल मानसून में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश का पूर्वानुमान दिया है। इस साल मानसून पर अल-नीनो प्रभाव माना जा रहा है। अल-नीनो प्रभाव वाले वर्षों में अक्सर जून में कम और जुलाई में अधिक बारिश होती है। फिलहाल देश के 13 राज्यों और करीब 50 फीसदी जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है।

राजस्थान में सामान्य से तीन गुना ज्यादा बारिश

जून में पश्चिमी राजस्थान में सामान्य से चार गुना अधिक बारिश हुई। वहीं, पूर्वी राजस्थान में सामान्य से लगभग दोगुना से अधिक बारिश हुई है। अक्सर सूखे की मार झेलने वाले राजस्थान में इस साल बिपरजॉय चक्रवात के कारण बारिश का सिलसिला शुरू हुआ। फिर मानसून के आगमन के साथ जून के आखिर तक सामान्य से 185 फीसदी अधिक बारिश हो चुकी है। इससे राजस्थान में खरीफ की बुवाई बढ़ी है। राज्य में मूंगफली, सोयाबीन और सूरजमुखी के अलावा कपास की खेती को अच्छी बारिश का लाभ मिलेगा।

बिहार, झारखंड बारिश को तरसे

पूर्वी यूपी, बिहार और झारखंड में सामान्य से क्रमश: 44, 48 और 43 फीसदी कम बारिश हुई है। इन क्षेत्रों में हीटवेव का प्रभाव रहा और अब कम बारिश की मार झेल रहे हैं। इसका असर खरीफ की बुवाई पर पड़ रहा है। बारिश कम होने के कारण किसान धान की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। इन राज्यों का बड़ा हिस्सा खेती के लिए वर्षा पर निर्भर है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना में कम बारिश

जिन राज्यों में सबसे कम बारिश हुई है उनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल भी शामिल हैं। महाराष्ट्र में सामान्य से 46 फीसदी, तेलंगाना में 50 फीसदी, कर्नाटक में 53 फीसदी और केरल में 60 फीसदी कम बारिश हुई है। महाराष्ट्र के मराठवाडा में तो सामान्य से 69 फीसदी कम बारिश हुई है। कृषि के लिहाज से महत्वपूर्ण भारत के इन राज्यों में बारिश की कमी खाद्यान्न उत्पादन और महंगाई पर नियंत्रण के लिहाज से शुभ संकेत नहीं है।

खरीफ की बुवाई ने जोर पकड़ा

मानसून सीजन का पहला महीना पूरा होने के बाद देश में खरीफ की बुवाई जोर पकड़ रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, 30 जून तक देश में 203.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल इस अवधि तक 202.33 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की बुवाई हुई थी।

इस दौरान धान की बुवाई घटी है जबकि तिलहन की बुवाई 14.52 फीसदी बढ़ी है। मोटे अनाजों की बुवाई में 61.65 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दलहन की बुवाई लगभग पिछले साल के स्तर पर है। मोटे अनाजों, दलहन और तिलहन की बुवाई बढ़ने के पीछे उत्तर पश्चिमी भारत में हुई बारिश बड़ी वजह है।  

धान की बुवाई 26 फीसदी घटी  

खरीफ की प्रमुख फसल धान की बुवाई करीब 26 फीसदी कम हुई है। मानसून में देरी और धीमी प्रगति के बाद अचानक तीन-चार दिनों में भारी बारिश से धान की बुवाई प्रभावित हुई है। 30 जून तक देश के 26.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई हो चुकी है। यह आंकड़ा पिछले साल इस समय 36.05 लाख हेक्टेयर था। जबकि पिछले साल भी जून में मानसून कमजोर रहा था, जिसके चलते शुरुआत में खरीफ की बुवाई कम हुई थी। अगर सामान्य वर्षों से तुलना करें तो इस साल धान की बुवाई लगभग आधी हुई है।

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