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पहल

पश्चिमी राजस्थान को अनार का गढ़ बनाने की तैयारी!

अनार शोध यात्रा का आयोजन नाबार्ड के कृषि निर्यात सुविधा केंद्र तथा साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर, जोधपुर द्वारा किया गया

anaar shodh yatra

अनार की बागवानी में महारथ हासिल करने के लिए राजस्थान के जोधपुर और बाड़मेर जिले के दो दर्जन प्रगतिशील किसानों ने सात दिवसीय अनार शोध यात्रा की है। अनार उत्पादन की लागत को कम करने, निर्यात क्वालिटी के अनार उत्पादन को बढ़ाने और मूल्य संवर्धन के लिए इन किसानों ने 4,527 किलोमीटर की यह शोध यात्रा महाराष्ट्र के पुणे, बारामती, पंढरपुर और शोलापुर में पूरी की। ये किसान पश्चिमी राजस्थान के तीन किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) से जुड़े हैं। अनार शोध यात्रा का आयोजन नाबार्ड के कृषि निर्यात सुविधा केंद्र तथा साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर, जोधपुर द्वारा किया गया। इस यात्रा में किसान अनार उत्पादन की आधुनिक तकनीक और बाजार तक पहुंच बनाने के तौर-तरीकों से रूबरू हुए।

अनार शोध यात्रा के तहत बुड़ीवाड़ा से शिव किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, गुड़ामालानी से अनंदित एफपीओ, जोधपुर से एग्रोनॉट एफपीओ और बाप से मरू उन्नति एफपीओ के अनार उत्पादक प्रगतिशील किसानों ने गत 5 जून से 11 जून तक महाराष्ट्र में अनार के उत्पादन, प्रोसेसिंग, एक्सपोर्ट और रिसर्च से जुड़े सरकारी और गैर-सरकारी केंद्रो का दौरा किया। इनमें कृषि विज्ञान केंद्र बारामती, अनार निर्यातक आईएनआई फॉर्म्स जिरेगांव, राष्ट्रीय अनार अनुसंधान केंद्र सोलापुर, यारा फर्टिलाइजर पंढरपुर, एग्रोस्टार-पुणे के अलावा सोलापुर व पंढरपुर में अनार किसानों बगीचों तथा पुणे में महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ का कृषि महाविद्यालय शामिल है।

अनार शोध यात्रा का संचालन कर रहे जोधपुर स्थित साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर के निदेशक डॉ. भागीरथ चौधरी ने बताया कि देश में 2.76 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कुल 315 लाख मीट्रिक टन अनार का उत्पादन होता है। जबकि राजस्थान में अनार का उत्पादन 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मात्र 82 हजार मीट्रिक टन होता है, जो राष्ट्रीय औसत उत्पादकता का लगभग आधा है। पश्चिमी राजस्थान में पैदा होने वाले अनार के दानों के लिए हाल ही में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बाजारों का खुलना राजस्थान में अनार उत्पादन के लिए बड़ा अवसर है। डॉ. चौधरी ने बताया कि राजस्थान में अनार उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। जरूरत इस बात की है कि किसानों को मार्केट से सीधा जोड़ा जाए, उच्च गुणवत्ता वाली सुपर भगवा सिंधुरी किस्म की पौध उपलब्ध करवाई जाए। साथ ही उत्पादन की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया जाए। किसानों को अनार की प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और एक्सपोर्ट चेन से जोड़ने की आवश्यकता है।

कृषि विज्ञान केंद्र बारामती की विभिन्न सुविधाओं जैसे कि इंडो-डच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजटेबल्स के भ्रमण के बाद किसानों का दल अनार निर्यातक आईएनआई फॉर्मस बारामती पहुंचे। जहां कम्पनी के वरिष्ठ अधिकारियों से अनार निर्यात, माल की गुणवत्ता और प्रकिया के बारे में बताया। अगले दिन किसानों ने राष्ट्रीय अनार अनुसंधान केंद्र सोलापुर में वरिष्ठ वैज्ञानिकों से अनार के पौधों की कटिंग से लेकर फल पकने तक संपूर्ण बागवानी की तकनीकी जानकारी प्राप्त की। साथ ही सोलापुर क्षेत्र के अनार किसानों के बगीचों को देखने का अवसर मिला। इस दौरान शोध यात्रा में शामिल किसानों ने कृष्णा गोदावरी सहकारी समिति द्वारा संचालित यारा फसल पोषण केंद्र का भ्रमण कर अनार पोषण प्रबंधन के प्रत्येक चरण के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की।

अनार शोध यात्रा के अगले पड़ाव में किसान एग्रोस्टार कंपनी के पुणे स्थित कार्यालय पहुंचे जहां एग्रोस्टार के विभिन्न कार्यक्रमों और कार्य प्रणाली संबंधी जानकारी ली। यात्रा के दौरान किसानों ने अनार की सिंधुरी भगवा किस्म के जनक डॉ. विनय सुपे संवाद किया और जरूरी जानकारियां लीं। शोध यात्रा का अंतिम पड़ाव कृषि महाविद्यालय का पुणे परिसर था।

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