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पर्यावरण

हिमालय पर गर्मी का हमला, बर्फ पिघलने से हिमस्खलन का खतरा

शिमला में बढ़ते तापमान ने तोड़ा रिकॉर्ड, उत्तराखंड में अधिक तापमान का अलर्ट जारी

उत्तराखंड के औली में इस साल बहुत कम बर्फबारी हुई
उत्तराखंड के औली में इस साल बहुत कम बर्फबारी हुई

इस साल गर्मी ने फरवरी में ही दस्तक दे दी। बसंत मानो गायब है! गुजरात के भुज में 16 फरवरी को तापमान 40 डिग्री सेल्सियस छू गया, जो एक रिकॉर्ड है। आज तक फरवरी में इतनी जल्दी भारत का तापमान 40 डिग्री कभी नहीं पहुंचा था। गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में अधिकतम तापमान सामान्य से 5-9 डिग्री सेल्सियस तक अधिक हैं। हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में तो तापमान सामान्य से 11-12 डिग्री सेल्सियस तक अधिक है। फरवरी में गर्मी के नए-नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब भी सामान्य से कई डिग्री ज्यादा गरम हैं। चरम मौसम की घटनाओं का सिलसिला बढ़ता जा रहा है।

शिमला में फरवरी का सर्वाधिक तापमान

18 फरवरी को शिमला का अधिकतम तापमान 23.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 14.4 डिग्री सेल्सियम दर्ज किया गया। ये दोनों सामान्य से 11 डिग्री सेल्सियस अधिक हैं जो नया रिकॉर्ड है। सामान्य तौर पर जितना शिमला का अधिकतम तापमान होना चाहिए, उतना तो अब न्यूनतम तापमान है। कुल्लू में अधिकतम तापमान 29.7 डिग्री सेल्सियस था जो सामान्य से 12 डिग्री अधिक है। सोलन का तापमान 29.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया जो सामान्य से 10 डिग्री अधिक है। हिमाचल में सामान्य से 10-12 डिग्री अधिक तापमान होना हिमालय की बदलती आबोहवा का अलार्म है।

उत्तराखंड में अधिक तापमान का अलर्ट

उत्तराखंड में मौसम विभाग ने फरवरी में अधिक तापमान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। देहरादून स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 18 से 20 फरवरी के दौरान उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलोंं में अधिकतम तापमान सामान्य से 6-8 डिग्री तक अधिक हो सकता है। इस कारण बर्फ तेजी से पिघलने और हिमस्खलन की संभावना जतायी गई है। प्रदेश की प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है। बांध व जलाशय तथा हिमस्खलन संभावित क्षेत्रों में प्रतिष्ठानों को अलर्ट किया गया है।

18 फरवरी को देहरादून में अधिकतम तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस था जो सामान्य से 6 डिग्री अधिक है। मसूरी में अधिकतम तापमान सामान्य से 10 डिग्री अधिक 21.6 डिग्री सेल्सियस था, जबकि न्यूनतम तापमान 11.1 डिग्री सेल्सियस था जो सामान्य से 8 डिग्री अधिक है। नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर में भी अधिकतम तापमान सामान्य से 8 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा है।

मौसम के बदले मिजाज के कारण इस साल उत्तराखंड में बहुत कम बर्फबारी हुई। औली के ढलानों पर बर्फ ना होने के कारण नेशनल स्कीइंग चैंपियनशिप रद्द करनी पड़ी। कम बर्फबारी और समय से पहले गर्मी की दस्तक के कारण हिमालय के ग्लेशियरों को लेकर चिंताएं जतायी जा रही हैं।

कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के कारण बढ़ी गर्मी

उत्तर भारत में ठंड का संबंध पश्चिमी विक्षोभ से है। इस साल पश्चिमी विक्षोभ कमजोर रहा, जिसके कारण पहाड़ों पर कम बर्फबारी और मैदानों में कम बारिश हुई। इसलिए फरवरी में ठंड कम है और गर्मी बढ़ रही है। इस साल एक जनवरी से 18 फरवरी तक देश में सामान्य से 36 फीसदी कम बारिश हुई है। इस दौरान उत्तराखंड में सामान्य से 58 फीसदी और हिमाचल में 25 फीसदी कम बारिश हुई।

एंटी-साइक्लोन भी बड़ी वजह

अरब सागर के ऊपर बने एंटी-साइक्लोन के कारण पाकिस्तान की तरफ से गर्म और शुष्क हवाएं पश्चिमी भारत की तरफ आ रही हैं। जिससे पश्चिमी भारत के राज्य में गर्मी बढ़ी है। इस साल अरब सागर के ऊपर एंटी-साइक्लोन जल्द बनने के कारण भी फरवरी गरम और शुष्क है। साथ ही अल-नीनो प्रभाव के चलते इस साल गर्मी ज्यादा पड़ने की आशंका जतायी जा रही है।

खेती को नुकसान की आशंका

इस साल फरवरी में गर्मी के रिकॉर्ड टूट सकते हैं। अगले कुछ दिनों तक तापमान बढ़ने और मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। यह फरवरी का सबसे गर्म महीना साबित हो सकता है, जो खेती के लिए नुकसानदेह है। अचानक गर्मी बढ़ने से गेहूं को पकने से पहले पर्याप्त समय नहीं मिलता और दाना सिकुड़ सकता है। राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र के अनुसार, फरवरी के पहले सप्ताह में प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में अधिकतम तापमान पिछले 7 साल के औसत से अधिक रहा है। हालांकि, सरकार इस साल भी रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन के दावे कर रही है। लेकिन पिछले साल मार्च में अधिक गर्मी पड़ने से गेहूं की फसल को नुकसान हुआ था। समय से पहले गर्मियों के आने से किसानों को ज्यादा सिंचाई करनी पड़ती है और जलाशय जल्दी सूख जाते हैं। फरवरी में बढ़ता तापमान देश की खाद्य सुरक्षा और जल संसाधनों के लिए संकट पैदा कर सकता है।

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