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साइबर क्राइम के खिलाफ डीजीपी अशोक कुमार की रचनात्मक पहल “साइबर एनकाउंटर्स”

साइबर क्राइम से मुकाबले की डिजिटल टिप्स के साथ “साइबर एनकाउंटर्स” के हिंदी संस्करण का विमोचन

साइबर अपराध की बढ़ती चुनौतियों को रोचक अंदाज में समझाती उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार और डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक ओपी मिनोचा की पुस्तक “साइबर एनकाउंटर्स” का हिन्दी संस्करण भी आ गया है। देहरादून के सेंट जोसेफ अकादमी सभागार में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुस्तक “साइबर एनकाउंटर्स” के हिंदी संस्करण का विमोचन किया। इस अवसर पर पूर्व डीजीपी अनिल के. रतूड़ी, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल सहित शहर के तमाम शिक्षाविद और गणमान्य लोग उपस्थित थे।

“साइबर एनकाउंटर्स” के बारे में बताते हुए डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि तेजी से बदलती टेक्नॉलाजी के कारण पूरा जीवन आनलाइन हो गया है। लेकिन साथ ही साइबर अपराध के खतरे भी बढ़ते जा रहे हैं। अपराधी सैकड़ों मील दूर बैठा होता है और कई बार उस तक पहुंचना मुश्किल होता है। जिस तेजी से साइबर अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है, उनसे निपटना पुलिस के लिए भी बड़ी चुनौती है। साइबर क्राइम से आम जनता को जागरुक करने के मकसद से “साइबर एनकाउंटर्स” पुस्तक लिखने का विचार उनके मन में आया। साइबर अपराधी कैसे ऑपरेट करते हैं और लोग उनके जाल में कैसे फंसते हैं, इन बातों को पुस्तक के जरिए सरल भाषा और दिलचस्प अंदाज में समझाने का प्रयास किया गया है।

“साइबर एनकाउंटर्स” पुस्तक साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हथकंडों से आम जनता को जागरुक कराने में मददगार हो सकती है। इसमें साइबर क्राइम से जुड़े 12 आपराधिक मामलों के एनकाउंटर की कहानी के माध्यम से बचाव के टिप्स दिए गये हैं। डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि साइबर टिप्स के माध्यम से साइबर अपराधियों का डिजीटल एनकाउंटर कर साइबर अपराधों को रोका जा सकता है। उन्होंने साइबर क्राइम के प्रति जागरुकता को शिक्षा पाठ्यक्रमों में शामिल करने पर जोर दिया। साथ ही युवाओं की भागीदारी में साइबर वारियर्स अभियान शुरू करने का ऐलान किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लेखकों को बधाई देते हुए कहा कि “साइबर एनकाउंटर्स” पुस्तक गागर में सागर भरने का कार्य कर रही है। साइबर क्राइम आज के समय की बड़ी चुनौती है और प्रदेश के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा इस चुनौती के सम्बन्ध में जनता को जागरूक करना इस पुस्तक की प्रासंगिकता को बढ़ा देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस साइबर क्राइम से निपटने में बहुत अच्छा काम कर रही है और देश के कोने कोने से साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेज रही है। यह पुस्तक साइबर क्राइम से संबंधित जागरूकता संदेश को जन-जन तक पहुंचाएगी।

दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने बताया कि आज के युग में किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे कीमती चीज उसका डेटा है। आमजन साइबर फ्रॉड से बच सकें, इसके लिए समाज व पुलिस को साथ मिलकर और सजग रहकर कार्य करना है। उन्होंने एथिकल हैकिंग जैसी शब्दावली पर भी सवाल उठाया। पूर्व डीजीपी अनिल के. रतूड़ी ने कहा कि पुस्तक महत्वपूर्ण विषय के साथ ही काफी रोमांचक है। पुस्तक के सह-लेखक ओपी मनोचा ने साइबर एनकाउंटर्स पुस्तक के उद्देश्य के बारे में बताया, साथ ही साइबर खतरों को समझने और उनका मुकाबला करने में पुस्तक के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम का संचालन जाने-माने आरजे कविन्द्र सिंह मेहता (RJ काव्या) ने अपने दिलचस्प अंदाज में किया। समापन से पूर्व पुस्तक के लेखकों के साथ एक विशेष हस्ताक्षर सत्र हुआ। विमोचन के बाद युवाओं व लेखकों के बीच संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें युवाओं ने ऑनलाइन गेंमिग, सोशल मीडिया, साइबर फ्रॉड आदि से सम्बन्धित सवाल किये गये। सवालों के जवाब देते हुए डीजीपी अशोक कुमार ने युवाओं से पुलिस के साथ मिलकर साइबर वॉरियर बनकर आम लोगों की मदद करने की अपील की। कार्यक्रम का समापन डॉ. अलकनंदा अशोक द्वारा सभी उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

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