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कृषि

केंद्र के फैसलों से किसानों को कई झटके, महाराष्ट्र में विरोध-प्रदर्शन

महंगाई पर अंकुश लगाने की केंद्र सरकार की कोशिशों ने किसानों को कई झटके दे दिए हैं। चुनावी से पहले सरकार खाने-पीने की चीजों की महंगाई को पूरी तरह काबू में रखना चाहती है। लेकिन इसके लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं, वो किसानों को पर भारी पड़ सकते हैं। प्याज के निर्यात और गन्ना जूस से एथेनॉल बनाने पर रोक को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। सोमवार को विपक्षी दलों के विधायकों ने महाराष्ट्र विधान भवन के बाहर प्रदर्शन किया। एनसीपी प्रमुख शरद पवार नासिक जिले में प्याज किसानों के विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए। पवार ने प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध तुरंत हटाने की मांग करते हुए इस निर्णय को “किसान विरोधी” निर्णय करार दिया।

किसानों को संबोधित करते हुए पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की कड़ी मेहनत को नजरअंदाज कर रही है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। प्याज और अंगूर उत्पादक पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध से उनकी परेशानी बढ़ जाएगी। जबकि सरकार का काम किसानों की मुश्किलें कम करना होता है।

मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्याज उत्पादकों के विरोध-प्रदर्शन में एनसीपी, कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), सीपीएम और विभिन्न किसान संगठन शामिल हुए। पवार ने एथेनॉल उत्पादन (गन्ने के रस और चीनी सिरप से) को रोकने के निर्णय को भी खतरनाक बताया। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार की नीतियां “किसान विरोधी” हैं। हमें सड़कों पर आने और रास्ता रोको प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा ताकि सरकार जाग जाए। उन्होंने दावा किया कि जो लोग नीतियां तय करते हैं उन्हें किसानों की परवाह नहीं है। बार-बार नीतियां बदलना ठीक नहीं है। वह दिल्ली जाकर संसद में इस मुद्दे को उठाएंगे।

वहीं केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि प्याज का निर्यात करने वाले थोड़े से किसान और कीमतों में अंतर का फायदा उठा रहे व्यापारियों को निर्यात पर रोक से नुकसान होगा, लेकिन इसका फायदा उपभोक्ता को मिलेगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंंदे का कहना है कि वे केंद्र से बात कर किसानों की समस्या का कोई ना कोई हल निकाला जाएगा।

किसानों को एक साथ कई झटके

सोमवार को सरकार ने एक और फैसला लेते हुए तेल रहित चावल की भूसी के निर्यात पर प्रतिबंध 31 मार्च 2024 तक बढ़ा दिया है। सरकार ने ऐसा दूध की कीमतों पर नियंत्रण के लिए किया है। तेल रहित चावल की भूसी पशुचारे में इस्तेमाल होती है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है। गेहूं की जमाखोरी और महंगाई रोकने के लिए सरकार ने खुदरा और थोक विक्रेताओं के लिए गेहूं के स्टॉक की लिमिट में काफी कटौती कर दी है। इस उपायोंं से खाद्य वस्तुओं के दाम घटने की उम्मीद है जिसका असर किसानों की उपज के दाम पर भी पड़ेगा।

फडणवीस बोले केंद्र खरीदेगा प्याज

राज्य में प्याज पर गरमाई राजनीति के बीच महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य विधान परिषद में कहा कि केंद्र उन किसानों से प्याज खरीदने को तैयार है जिनका प्याज बिका नहीं है या जिसकी बोली नहीं लग पाई। इसकी कीमत की घोषणा जल्द की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्याज के निर्यात पर लगी रोक से उत्पन्न स्थिति से निपटने के तरीके तलाशे जा रहे हैं। फडणवीस का यह बयान शनिवार की रात राज्य के किसानों की समस्या को लेकर मुंबई में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं जन वितरण मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद आया है।

आरबीआई को महंगाई तो किसान को नुकसान का डर

शुक्रवार को आरबीआई गर्वनर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति पेश करते हुए, सबसे ज्यादा खाद्य महंगाई के बढ़ने की ओर इशारा किया है। साफ है कि आरबीआई और सरकार को इस बात का डर, कम उत्पादन होने से खाने-पीने की चीजें महंगी होंगी। ऐसे में निर्यात पर सख्ती और बाजार में ज्यादा से ज्यादा फसलों की उपलब्धता जरूरी है। वहीं सरकार द्वारा महंगाई रोकने के उपायों से पहले से ही मौसम की मार झेल रहे किसानों की आमदनी को झटका लग सकता है। चावल निर्यात पर लगी पांबदियों के चलते हरियाणा-पंजाब में धान के दाम गिर गये थे।

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