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शुगर लॉबी के सामने नरम पड़ी सरकार, गन्ना जूस से एथेनॉल बनाने की छूट रहेगी

मजबूती शुगर लॉबी के दबाव के चलते आखिरकार केंद्र सरकार को अपने एक सप्ताह पुराने फैसले से यू-टर्न लेना पड़ा। देश के चीनी उत्पादन में गिरावट को देखते हुए केंद्र सरकार ने गन्ने के जूस से एथेनॉल बनाने पर रोक लगा दी थी। जिससे शुगर इंडस्ट्री काफी चिंतित थी।

शुक्रवार को इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के सालाना कार्यक्रम में ही खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने एथेनॉल उत्पादन के लिए सप्ताह भर पुराने आदेश में ढील देने के संकेत दे दिए थे। केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को राहत देते हुए गन्ने के जूस और बी-हैवी मोलासेज (शीरा) दोनों के उपयोग से एथेनॉल उत्पादन की बात कही है। एथेनॉल बनाने के लिए अधिकतम 17 लाख टन चीनी के इस्तेमाल की लिमिट तय की जाएगी। जल्द ही इस बारे में अधिसूचना जारी हो सकती है। पिछले सीजन में 38 लाख टन चीनी का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने के लिए किया गया था।

इस बीच, खाद्य मंत्रालय ने सभी चीनी मिलों और डिस्टिलरीज को ताजा निर्देश जारी किया है। मंत्रालय ने कहा कि तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) “प्रत्येक डिस्टिलरी” को इस साल के लिए “गन्ने के रस और बी हेवी मोलासेज आधारित एथेनॉल” का “संशोधित आवंटन” जारी करेंगी। संशोधित आवंटन प्राप्त होने के बाद, चीनी मिलों और डिस्टिलरीज को गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेज की संशोधित मात्रा के अनुसार ही एथेनॉल की आपूर्ति करने के लिए कहा गया है।

मंत्रियों की समिति ने दी मंजूरी

इस मामले पर शुक्रवार को मंत्रियों की समिति की बैठक हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया कि आपूर्ति वर्ष 2023-24 (नवंबर-अक्टूबर) में एथेनॉल उत्पादन के लिए 17 लाख टन चीनी की कुल सीमा के भीतर गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे दोनों का इस्तेमाल करने की छूट चीनी मिलों को दी गई है। उन्होंने कहा कि मंत्रियों की समिति ने शुक्रवार को अपनी बैठक के दौरान यह निर्णय लिया। उद्योग जगत से आई मांगों पर गौर करने के बाद यह फैसला किया। इस मामले को लेकर उद्योग जगत की प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के साथ भी मीटिंग हो चुकी है।

किस अनुपात में गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेज से एथेनॉल उत्पादन की छूट दी जाएगी, इस पर विचार किया जा रहा है। 7 दिसंबर का आदेश जारी होने से पहले गन्ने के रस से लगभग छह लाख टन एथेनॉल बनाया जा चुका था। इस साल महाराष्ट्र और कर्नाटक में कमजोर मानसून से पैदा हालात की वजह से गन्ना उत्पादक को झटका लगेगा। अनुमान है कि मौजूदा साल 2023-24 में देश का चीनी उत्पादन घटकर 323-330 लाख टन रह जाएगा जो पिछले पेराई सत्र में 373 लाख टन था।

15 हजार करोड़ के निवेश को लेकर चिंता

गन्ने के जूस से एथेनॉल उत्पादन पर रोक के फैसले से पूरी शुगर इंडस्ट्री में हडकंप मच गया था। चीनी उद्योग के संगठन इसमा ने चिंता जताई थी कि अचानक प्रतिबंध लगाने से चीनी मिलों की क्षमता उपयोग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और 15 हजार करोड़ रुपये का निवेश खतरे में पड़ सकता है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई चीनी मिलों ने एथेनॉल उत्पादन की क्षमता में विस्तार किया है। कई ऐसी डिस्टलरी हैं जो गन्ने के जूस से ही एथेनॉल बनाती हैं। चीनी के बजाय एथेनॉल बनाकर तेल कंपनियों को बेचने से चीनी मिलों को अच्छा मुनाफ होता है और उन्हें भुगतान भी जल्द मिलता है। इससे चीनी मिलें किसानों को समय पर भुगतान कर पाती हैं।

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