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यूपी-पंजाब-राजस्थान-हरियाणा में झींगा पालन को मिलेगा बढ़ावा, मत्स्य सम्पदा योजना से जोड़ने की तैयारी

यूपी,पंजाब, राजस्थान और हरियाणा में झींगा पालन को बढ़ावा देने की तैयारी है। और इसके लिए 4 राज्यों के 25 जिलों की पहचान कर, वहां पर झींगा पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके तहत ऐसे जिलों को शामिल किया जाएगा, जहां कृषि योग्य भूमि कम है और खारे पाने की उपलब्धता है। इन जिलों में झींगा पालान को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना से भी जोड़ा जाएगा। जिससे किसानों को सब्सिडी मिल सके और उनके लिए झींगा पालन करना आसान हो सके। केंद्र सरकार की कोशिश है कि चिन्हित 25 जिलों में रोजगार और आजीविका के साधन विकसित किए जाएंगे।

झींगा क्यों अहम

असल में मूल्य के लिहाज से भारत के कुल समुद्री भोजन निर्यात में झींगे का योगदान 65 फीसदी से ज्यादा है। भारत में खारे पानी वाले लगभग 1.2 मिलियन हेक्टेयर संभावित क्षेत्र हैं। इसके अतिरिक्त, तटीय क्षेत्रों में 1.24 मिलियन हेक्टेयर नमक से प्रभावित मिट्टी उपलब्ध है। आईसीएआर-सीआईबीए की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 8.62 मिलियन हेक्टेयर अंतर्देशीय लवणीय मिट्टी उपलब्ध है, लेकिन सिर्फ 1.28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही खेती होती है। सरकार का लक्ष्य अतिरिक्त 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को जलीय कृषि के अंतर्गत लाना है। जिसके लिए झींगा पालन किसानों की इनकम बढ़ाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए उपयुक्त है। इसी संभावना को देखते हुए हाल ही में मत्स्यपालन विभाग ने हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में खारे जल में झींगापालन की समीक्षा के लिए एक बैठक भी की है।

पीएम मत्स्य सम्पदा योजना से जोड़ने की तैयारी

बैठक में यह तय किया गया है कि सभी चार राज्य सुनिश्चित करेंगे कि उनके खारा प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए परियोजना संबंधी प्रस्तावों को पीएमएमएसवाई के तहत अपेक्षित सहायता के लिए अगले वर्ष की वार्षिक योजना में उचित रूप से शामिल किया जाए। भी प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना योजना के तहत क्रेडिट कार्ड धारक किसानों और मछुआरों को बिना किसी गारंटी के 2 लाख तक का लोन केवल 7 प्रतिशत की ब्याज दर से दिया जाता है। महिलाओं और अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को मछली पालन बिजनेस शुरू करने के लिए 60 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है, जबकि सामान्य वर्ग के तहत आने वाले पुरूषों को 40 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है। योजना का लाभ एफपीओ, मछली सहकारी समितियां, स्वयं सहायता समूह, कारोबारी वर्ग के लोग भी उठा सकते हैं।

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