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मानसून की कमजोर शुरुआत, 77% जिलों में सामान्य से कम बारिश

देश के 36 मौसम क्षेत्रों में से 28 क्षेत्रों में सामान्य से कम या बहुत कम बारिश हुई

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इस साल मानसून की कमजोर शुरुआत के बाद देश में सामान्य से 51% कम बारिश हुई है। ज्यादातर राज्य भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। हालांकि, अरब सागर से उठे चक्रवाती तूफान बिपारजॉय के कारण पश्चिम व उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में बारिश जरूर हुई लेकिन ओवरऑल मानसून की स्थिति कमजोर नजर आ रही है।  

केरल में जहां मानसून सबसे पहले पहुंचता है, वहां भी सामान्य से 57% कम बारिश हुई। देश के 36 मौसम क्षेत्रों में से 28 क्षेत्रों में सामान्य से कम या बहुत कम बारिश हुई है। जिलेवार देखें तो देश के 716 जिलों में से 77% जिलों में सामान्य से कम या बहुत कम बारिश दर्ज की गई है! पूर्वी यूपी में सामान्य से 98%, छत्तीसगढ़ में 95%, मराठवाडा में 88% और पश्चिमी यूपी में 85% कम बारिश दर्ज की गई है। ये आंकड़े 1 जून से 15 जून के बीच हुई बारिश के हैं।

सामान्य तौर पर भारत में मानसून सीजन की शुरुआत 1 जून से होती है। लेकिन इस साल मानसून 8 जून को केरल पहुंचा। मानसून की धीमी प्रगति बारिश के आंकड़ों में भी नजर आ रही है। एक जून से 15 जून के बीच देश के 74% भू-भाग पर सामान्य से कम बारिश हुई है। मौसम विभाग का कहना है कि 18 जून से 21 जून के बीच मानसून के दक्षिण प्रायद्वीप, पूर्वी भारत और आसपास के क्षेत्रों में आगे बढ़ने की परिस्थितियां बन रही हैं। इससे दक्षिण, मध्य और पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में बारिश होने और गर्मी से राहत मिलने की संभावना है।

मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र का कहना है कि चक्रवाती तूफान बिपारजॉय ने खुद को मानसून के प्रवाह से पूरी तरह अलग कर लिया है और मानसून की प्रगति पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। महापात्र के मुताबिक, चक्रवात ने भूमध्यरेखीय प्रवाह को मजबूत कर मानसून को आगे बढ़ने में मदद की है।

कई विशेषज्ञों का मानना है कि अरब सागर में चक्रवाती तूफान के कारण मानूसन कमजोर पड़ा और इसके आगे बढ़ने में देरी हुई। लेकिन अब यह चक्रवात मानसून के प्रवाह से अलग हो गया है, इसलिए 18 जून के बाद मानसून के आगे बढ़ने की संभावना है। कई जानकार इस साल मानसून पर अल नीनो प्रभाव मान रहे हैं। हालांकि, मौसम विभाग ने कहा था कि अल-नीनो की स्थितियों के बावजूद मानसून सीजन के दौरान भारत में सामान्य बारिश होने की उम्मीद है। देखना है कि मौसम विभाग का पूर्वानुमान कितना सही निकलता है।

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