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कृषि क्षेत्र की ग्रोथ रेट घटकर आधी रही, चुनावी साल में बढ़ी इकोनॉमी की चुनौती

भारतीय रिजर्व बैंक सहित सभी प्रमुख रिसर्च एजेंसियों और अर्थशास्त्रियों के अनुमानों के विपरीत भारतीय इकोनॉमी ने दूसरी तिमाही में कहीं ज्यादा ग्रोथ हासिल की है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.6 फीसदी रही है। लेकिन इस अच्छी खबर के बीच कृषि क्षेत्र से अच्छे संकेत नहीं मिल रहे हैं। दूसरी तिमाही में एक तरफ जहां मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, माइनिंग ने डबल डिजिट ग्रोथ हासिल की है। वही कृषि क्षेत्र की ग्रोथ रेट घटकर आधी रह गई है। दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र केवल 1.2 फीसदी की दर से बढ़ा है। जबकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कृषि क्षेत्र की ग्रोथ रेट 3.5 फीसदी रही थी। बीते वित्त वर्ष (2022-23) की दूसरी तिमाही में यह 2.5 फीसदी थी।

4.35 लाख करोड़ का कृषि क्षेत्र

कृषि क्षेत्र को लेकर दूसरी तिमाही का एक और आंकड़ा परेशान करने वाला है। दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र 4,35,371 करोड़ रुपये का रहा है। जबकि पहली तिमाही में यह 5,13,946 करोड़ रहा था। साफ है कि जीडीपी की दमदार ग्रोथ में इस बार कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। और आंकड़ों से साफ है कि अनियमित मानसून की वजह से फसलों की पैदावार पर असर पड़ा है। इससे किसानों की आमदनी घटी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है। चिंता की बात यह है कि अल-नीनो का असर रबी सीजन में भी रहने की आशंका विशेषज्ञों ने जताई है। ऐसे में अगली तिमाही में भी इसका असर दिख सकता है। कृषि क्षेत्र उलट दूसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग 13.9 फीसदी ग्रोथ के साथ 7.15 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। जबकि कंस्ट्रक्शन क्षेत्र 13.3 फीसदी ग्रोथ के साथ 3.04 लाख करोड़ रहा है।

चावल का उत्पादन अभी भी निगेटिव

सरकार द्वारा बृहस्पितवार को जारी जीडीपी के आंकड़ों के अनुसार देश में दूसरी तिमाही में चावल का उत्पादन निगेटिव जोन में रहा है। इस दौरान -3.1 फीसदी ग्रोथ रही है। हालांकि यह पहली तिमाही की तुलना में बेहतर रहा है। पहली तिमाही में चावल का उत्पादन -14.9 फीसदी रहा था। इस बार मानसून असामान्य रहने के कारण प्याज, चीनी सहित दूसरी अहम फसलों के उत्पादन में कमी की आशंका है। इसके अलावा दालों की महंगाई भी 20 फीसदी के करीब है। जो किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

ग्रामीण इलाकों में महंगाई ज्यादा

कृषि क्षेत्र का एक और आंकड़ा चिंताए बढ़ा रहा है। वह महंगाई का है, क्योंकिं भले ही खुदरा महंगाई कम हो रही है लेकिन शहरों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में महंगाई ज्यादा है। अक्टूबर में ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 5.12 फीसदी तो खाद्य महंगाई दर 6.71 फीसदी थी। जबकि शहरी इलाकों में महंगाई दर 4.62 फीसदी पर आ गई जबकि खाद्य महंगाई दर 6.35 फीसदी रही।

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