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सरकार के एक फैसले से चीनी कंपनियों की बल्ले-बल्ले, एक दिन में 8 फीसदी बढ़े स्टॉक

सरकार के एक फैसले ने चीनी कंपनियों की बल्ले-बल्ले कर दी है। सोमवार को शेयर बाजार में चीनी कंपनियों के शेयर 8 फीसदी तक बढ़ गए। सबसे ज्यादा फायदा सिंभावली शुगर्स को हुआ, जिसके शेयर 8.3 फीसदी की तेजी के साथ बंद हुए। इसके अलावा धामपुर शुगर,राणा शुगर्स,श्री रेणुका शुगर्स, मवाना शुगर्स, डालमिया भारत शुगर और बजाज हिंदुस्तान शुगर के शेयरों में तेजी देखी गई। असल में शुक्रवार रात सरकार ने एथनॉल को लेकर अपना पुराना फैसला पलट दिया था। और एक बार फिर चीनी मिलें गन्ने के जूस और बी-हैवी मोलासेज (शीरा) के उपयोग से एथेनॉल बनाने सकेंगी। हालांकि इसके तहत एथेनॉल बनाने के लिए अधिकतम 17 लाख टन चीनी के इस्तेमाल की लिमिट तय की जाएगी।

शेयरों में कितनी तेजी

सरकार के इस यू टर्न का सोमवार को शेयर बाजार ने स्वागत किया। और सभी प्रमुख चीनी कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई। दिन में तो कंपनियों के शेयर 11 फीसदी तक बढ़ गए थे। और उसके बाद शाम तेजी के साथ बंद हुए। आज बीएसई पर चीनी कंपनियों के शेयर का ऐसा रहा हाल….

सिंभावली शुगर्स: 8.3 फीसदी
बजाज हिंदुस्तान शुगर : 6.29 फीसदी
धामपुर शुगर : 5.38 फीसदी
द्वारिकेश शुगर: 5.3 फीसदी
श्री रेणुका शुगर्स : 4.75 फीसदी
बलरामपुर चीनी :4.49 फीसदी
राणा शुगर्स : 3.79 फीसदी
मवाना शुगर्स : 3.64 फीसदी
डालमिया भारत शुगर : 3.47 फीसदी
ईआईडी पैरी:1.08 फीसदी

15 हजार करोड़ के निवेश को लेकर थी चिंता

असल में जब सरकार ने 7 दिसंबर को गन्ने के जूस से एथेनॉल उत्पादन पर रोक लगाई थी। तो शुगर इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया था। चीनी उद्योग के संगठन इसमा ने चिंता जताई थी कि अचानक प्रतिबंध लगाने से चीनी मिलों की क्षमता उपयोग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और 15 हजार करोड़ रुपये का निवेश खतरे में पड़ सकता है।

पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई चीनी मिलों ने एथेनॉल उत्पादन की क्षमता में विस्तार किया है। कई ऐसी डिस्टलरी हैं जो गन्ने के जूस से ही एथेनॉल बनाती हैं। चीनी के बजाय एथेनॉल बनाकर तेल कंपनियों को बेचने से चीनी मिलों को अच्छा मुनाफा होता है और उन्हें भुगतान भी जल्द मिलता है। इस्मा ने यह भी कहा था कि रोक के इस फैसले से किसानों को समय पर भुगतान पर भी असर होगा। इसके बाद शुगर इंडस्ट्री से जुड़े प्रतिनिधियों ने पीएमओ के साथ बैठक भी की थी। जिसके बाद सरकार ने फिर से उत्पादन की अनुमति दी है।

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