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संकट में घरेलू खाद्य तेल उद्योग, क्रूड और रिफाइंड ऑयल के बीच शुल्क अंतर बढ़ाने की मांग

edible oil

बढ़ते सस्ते आयात से परेशान खाद्य तेल उद्योग ने केंद्र सरकार से संरक्षण की मांग की है। खाद्य तेल उद्योग के संगठन एसईए ने सरकार से क्रूड और रिफाइंड पाम तेल के बीच आयात शुल्क अंतर को 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करने की मांग की है। 2023 के ऑयल मार्केटिंग सीजन में भारत में रिकॉर्ड 167.1 लाख टन वनस्पति तेलों का आयात किया गया है। संगठन ने कहा है कि भारतीय वनस्पति तेल (खाद्य और गैर-खाद्य तेल मिलाकर) रिफाइनिंग इंडस्ट्री इस समय चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में हमें सपोर्ट की जरूरत है, जिससे कि घरेलू उद्योग संकट में न पड़े।

क्या है समस्या

एसईए के अध्यक्ष अजय झुनझुनवाला ने संगठन के सदस्यों को लिखे पत्र में कहा है कि 3 लाख करोड़ रुपये के भारतीय खाद्य तेल उद्योग का काफी महत्व है। पिछले 12 वर्षों में इंडोनेशिया और मलेशिया ने रिफाइंड तेल की तुलना में क्रूड पाम तेल (सीपीओ) पर अधिक निर्यात शुल्क लगाया है। इससे रिफाइंड तेल सस्ता हो गया है जिससे भारतीय रिफाइनिंग उद्योग संकट का सामना कर रहा है। झुनझुनवाला ने कहा कि भारत में क्रूड और रिफाइंड पाम तेल के बीच शुल्क अंतर को घटाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया गया है। जिसका मलेशिया और इंडोनेशिया में रिफाइनिंग उद्योग को फायदा मिल रहा है।

इंडस्ट्री पर निगेटिव असर

शुल्क अंतर कम होने से घरेलू वनस्पति तेल रिफाइनिंग उद्योग पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में सरकार को क्रूड और रिफाइंड पाम तेल के बीच आयात शुल्क अंतर को 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर देना चाहिए। एसईए अध्यक्ष ने कहा कि नवंबर, 2022-अक्टूबर, 2023 के ऑयल मार्केटिंग सीजन में भारत ने 167.1 लाख टन वनस्पति तेलों का आयात किया। खाद्य तेलों का आयात 164.7 लाख टन के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया।

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