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‘सीड लेडी’ डॉ. स्वाति नायक को नॉर्मन बोरलॉग फील्ड अवॉर्ड, जानिए उनकी उपलब्धियां

Dr. Swati Nayak

कृषि वैज्ञानिक डॉ. स्वाति नायक को साल 2023 के प्रतिष्ठित नॉर्मन बोरलॉग फील्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। विश्व खाद्य पुरस्कार फाउंडेशन ने यह घोषणा करते हुए बताया कि डॉ. स्वाति नायक को यह सम्मान चावल की जलवायु अनुकूल और पौष्टिक किस्में विकसित करने में छोटे किसानों को शामिल करने के उनके अभिनव दृष्टिकोण के लिए प्रदान किया जाएगा।

डॉ. स्वाति नायक अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) में बीज प्रणाली और उत्पाद प्रबंधन की दक्षिण एशिया प्रमुख हैं। आईआरआरआई में उन्होंने चावल-आधारित खाद्य पद्धतियों पर कई वैश्विक कार्यक्रमों का नेतृत्व किया। वे वैश्विक शोध साझेदारी CGIAR के SeedEqual कार्यक्रम में चावल की ग्लोबल लीड भी हैं।

नॉर्मन बोरलॉग फील्ड अवॉर्ड हरित क्रांति के जनक, प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. नॉर्मन ई. बोरलॉग की स्मृति में कृषि और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में असाधारण वैज्ञानिक योगदान करने वाले 40 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को प्रदान किया जाता है। डॉ. नायर को अगले महीने आयोवा (यूएस) में होने वाले समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान पाने वाली वे तीसरी भारतीय हैं। इससे पहले 2012 में मानव भूगोलवेत्ता डॉ. अदित मुखर्जी और 2022 में कृषि वैज्ञानिक डॉ. महालिंगम गोविंदराज को यह पुरस्कार मिला था।

एमिटी यूनिवर्सिटी से कृषि विस्तार प्रबंधन रणनीति में पीएचडी (2017-2022) और ग्रामीण प्रबंधन संस्थान, आनंद से रूरल मैनेजमेंट में मास्टर (2008-2010) करने के बाद डॉ. स्वाति नायर ने वैज्ञानिक ज्ञान और किसानों के बीच दूरी को कम करने की दिशा में काम किया। उन्होंने 10 राज्यों के साथ मिलकर महिला किसानों के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू कराने में अहम भूमिका निभाई। विश्व खाद्य पुरस्कार फाउंडेशन का मानना है कि उनके योगदान से करीब 40 लाख महिला किसानों को लाभान्वित करने वाले कार्यक्रम की नींव पड़ी।

डॉ. स्वाति नायक और उनकी टीम ने ओडिशा में सूखा-सहिष्णु चावल सहभागी धान के प्रसार की रणनीति बनाई थी। जल्द ही यह किस्म कृषक परिवारों के खानपान और फसल चक्र का एक हिस्सा बन गई। आज सहभागी धान ओडिशा और शेष भारत में सर्वाधिक मांग वाली किस्मों में से एक है। उन्होंने “सीड विदाउट बॉर्डर्स” नीति के माध्यम से दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में चावल की आधुनिक किस्मों के प्रसार में भी अहम भूमिका निभाई। बीजों के साथ डॉ. स्वाति के जुड़ाव को देखते हुए ओडिशा के स्थानीय समुदायों में उन्हें “बिहाना दीदी” यानी “सीड लेडी” बुलाया जाता है।

विश्व खाद्य पुरस्कार फाउंडेशन के सीईओ मशाल हुसैन का कहना है कि डॉ. स्वाति नायक ने अपनी टीम के साथ मिलकर जलवायु संकट के बीच तेजी से बढ़ती आबादी के भरण-पोषण की कठिन चुनौती के लिए अभिनव और सहभागी समाधान तैयार करने में अहम योगदान दिया। उन्होंने दुनिया भर में चावल की बेहतर किस्मों, बीज प्रणाली नवाचारों और जलवायु-स्मार्ट तकनीक का प्रसार किया।

डॉ. स्वाति नायक एशिया और अफ्रीका के विभिन्न देशों में हजारों छोटे किसानों के साथ काम करते हुए 500 से अधिक चावल किस्मों के लिए 10 हजार से अधिक ऑन-फार्म परीक्षण करवा चुकी हैं। चावल की 20 से अधिक जलवायु-अनुकूल किस्मों के प्रसार में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। इस तरह किसानों और महिलाओं को उपज बढ़ाने, पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और आर्थिक भविष्य को सुरक्षित बनाने में मदद की।

साल 2022 में, डॉ. स्वाति नायक के प्रयासों से महिला नेतृत्व वाले बीज उद्यम लगभग 8.5 मीट्रिक टन गुणवत्तापूर्ण बीजों का उत्पादन, वितरण और बिक्री करने में सफल हुए। उनके कार्यक्रमों में 40% से अधिक प्रतिभागी महिला किसान रही हैं। नायक के शोध के परिणामस्वरूप न केवल कृषि उत्पादकता में वृद्धि हुई, बल्कि महिलाओं की आय और निर्णय क्षमता भी बढ़ी है। महिलाओं का सशक्तिकरण हुआ। जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर वे टिकाऊ कृषि की वकालत करती हैं। उनके प्रयासों से भारत, बांग्लादेश और नेपाल में चावल की कई जलवायु-अनुकूल किस्मों को बढ़ावा दिया गया।

पुरस्कार पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए डॉ. स्वाति नायक ने कहा, “नॉर्मन बोरलॉग भूखमरी-मुक्त विश्व की दिशा में वैज्ञानिकों को प्रेरित करते हैं। मैं यह पुरस्कार हजारों कृषि विस्तारकों, बदलाव के वाहकों, नवाचार विशेषज्ञों को समर्पित करती हूं। विशेष रूप से उन सभी युवा महिला पेशेवरों को जो सीधे किसानों के साथ काम कर रही हैं।” डॉ. स्वाति नायक को प्रतिष्ठित नॉर्मन बोरलॉग पुरस्कार के लिए नामित किए जाने पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बधाई दी है।

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