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घटेगा चीनी-दाल-प्याज का उत्पादन, महाराष्ट्र में सूखे का असर

महाराष्ट्र में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई है। राज्य के जलाशयों में पिछले साल की तुलना में जल स्तर 20 फीसदी गिर गया है। जिसका सीधा असर रबी फसलों के उत्पादन पर दिखने की आशंका बढ़ गई है। प्याज, दाल, चीनी, फल-सब्जियों का उत्पादन अगर कम हुआ तो उसका असर देश भर में कीमतों पर दिखेगा। देश के कुल प्याज उत्पादन में महाराष्ट्र की 40 फीसदी , चीनी उत्पादन में 33 फीसदी और दाल उत्पादन में करीब 15-16 फीसदी हिस्सेदारी है।

प्रमुख इलाकों में कम बारिश

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, मानसून के दौरान महाराष्ट्र में वैसे तो बारिश सामान्य रही, लेकिन मराठवाड़ा, उत्तरी महाराष्ट्र , मध्य महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में बारिश कम हुई है। वहीं रबी सीजन में 1 अक्टूबर से 15 नवंबर तक बारिश को भारी कमी कैटेगरी में रखा गया है। जिसका असर फसलों की बुआई पर हुआ। खास तौर से प्याज के उत्पादन ज्यादा असर पड़ने की आशंका है।

प्याज की फसल को नहीं मिला पानी

रबी सीजन में प्याज की फसल को तैयार होने में कहीं ज्यादा समय लगता है। इस अवधि में उसे 90 दिन की जगह 120 दिन का समय लगता है। महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में किसान पानी की कमी के कारण आवश्यक सिंचाई नहीं कर पाएंगे।

चीनी का भी घटेगा उत्पादन

अगस्त में सामान्य से 59 फीसदी कम बारिश होने के कारण गन्ने की फसल को सबसे अहम समय पर्याप्त पानी नहीं मिला है। जिससे सभी जिलों में फसलों की वृद्धि पर असर हुआ है। इसकी वजह से चीनी का उत्पादन केवल 90 लाख टन रह सकता है, जो 2022-23 के 109 लाख टन के उत्पादन की तुलना में करीब 20 फीसदी कम है।

दाल का भी घटेगा उत्पादन

इसी तरह कम बारिश का असर दालों के उत्पादन पर भी दिख सकता है। अनुमान है कि चना के बुआई क्षेत्र में भी 10-15 फीसदी की गिरावट आ सकती है। ऐसे में पहले से 19 फीसदी की महंगाई दर पर पहुंच चुकी दालों की महंगाई, आने वाले दिनों में सरकार की चुनौती बढ़ा सकती है।

महाराष्ट्र के कई इलाकों में ज्वार किसानों का मुख्य भोजन है, मगर ज्वार की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं। ज्वार की थोक कीमतें 85 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी हैं। इसी तरह गेहूं उत्तरी महाराष्ट्र और विदर्भ की उपज कई जिलों में कुछ महीनों के लिए अनाज की आवश्यकता को पूरा करती है। राज्य के गेहूं उत्पादन में भी गिरावट की आशंका है।

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