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मानसून में देरी से खरीफ बुआई 49% पिछड़ी, एग्री लोन डिफॉल्ट की आशंका  

कमजोर मानसून से कृषि उत्पादन को झटका लग सकता है, जिससे महंगाई पर अंकुश लगाना मुश्किल हो जाएगा

Photo by Kabiur Rahman Riyad on Unsplash
Photo by Kabiur Rahman Riyad on Unsplash

इस साल मानूसन में देरी का असर खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ रहा है। वर्षा पर निर्भर खरीफ फसलों की बुआई पिछले साल के मुकाबले 49.43 फीसदी कम हुई है। हालांकि, इस साल मौसम विभाग ने सामान्य मानसून का अनुमान लगाया था लेकिन मानूसन केरल ही देर से पहुंचा और फिर धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि चक्रवात बिपरजॉय के कारण मानसून बाधित हुआ। अल नीनो प्रभाव के चलते भी मानसून कमजोर पड़ सकता है। अगर अगले एक-दो सप्ताह में बारिश की कमी दूर ना हुई तो खरीफ उत्पादन को झटका लग सकता है और महंगाई पर अंकुश लगाना मुश्किल हो जाएगा।  

खरीफ की बुआई पिछड़ी

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 16 जून तक करीब 49.48 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल इस अवधि तक यह आंकड़ा 97.84 लाख हेक्टेअर था। इस तरह खरीफ फसलों की बुआई करीब आधी (49%) ही हुई है।

16 जून तक कुल 1.80 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में दलहन फसलें बोई जा चुकी हैं, जबकि पिछले साल इस तारीख तक 4.22 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में दलहन की बुआई हुई थी। इस प्रकार दलहन की बुआई 57.27 फीसदी कम है। सबसे ज्यादा असर मूंग और अरहर की बुआई पर पड़ा है। मूंग की बुआई 79 फीसदी और अरहर की बुआई 64 फीसदी कम है।

जोर पकड़ेगी धान की बुआई   

देश के कई राज्यों में मानसून के आगमन के साथ धान की बुआई जोर पकड़ने लगी है। 16 जून तक करीब 5.32 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में धान की बुआई हुई, जबकि गत वर्ष यह आंकड़ा 6.23 लाख हेक्टेअर था। धान की बुआई 14.66 फीसदी कम है। कृषि आयुक्त पीके सिंह ने उम्मीद जताई है कि जैसे-जैसे मानसून आगे बढ़ेगा, देश के विभिन्न क्षेत्रों में धान की बुआई जोर पकड़ेगी। जिन इलाकों में बारिश हुई है वहां अच्छी बुआई हुई है।

मोटे अनाजों का क्षेत्र बढ़ा

देश के खाद्यान्न उत्पादन में करीब आधी हिस्सेदारी खरीफ फसलों की है। इस साल मोटे अनाजों की बुआई में बढ़ोतरी दिख रही है। पिछले साल 16 जून तक देश में कुल 7.57 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में मोटे अनाजों की बुआई हुई थी, जबकि इस साल यह आंकड़ा 12.43 लाख हेक्टेअर है। मोटे अनाजों की बुवाई 64 फीसदी बढ़ी है।

मानसून की धीमी प्रगति के कारण तिलहन की बुआई में 14 फीसदी की कमी आई है। 16 जून तक देश में कुल 4.11 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में तिलहन फसलों की बुआई हुई थी, जबकि गत वर्ष इस तिथि तक यह आंकड़ा 4.80 लाख हेक्टेअर था। इस साल बारिश में कमी के कारण खरीफ की बुआई 7-10 दिन पिछड़ गई है। खरीफ सीजन की प्रमुख तिलहन फसल सोयाबीन की बुवाई में 69 फीसदी और सूरजमुखी की बुवाई में 64 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।

देश में सामान्य से 33 फीसदी कम बारिश

एक जून से शुरू हुए मानसून सीजन में 20 जून तक देश में सामान्य से 33 फीसदी कम बारिश हुई है। कृषि के लिहाज से महत्वपूर्ण मध्य भारत में सामान्य से 58 फीसदी और दक्षिणी भारत में सामान्य से 60 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। उम्मीद है कि इस सप्ताह देश के बाकी हिस्सों में मानसून पहुंचेगा और बारिश में कमी का आंकड़ा कम होगा। इस साल मानसून पर अल नीनो के असर की आशंका भी जताई जा रही है।

एग्री लोन डिफाल्ट का खतरा, किसानों को राहत का सुझाव  

भारत की अर्थव्यवस्था मानसून पर निर्भर है। मानसून कमजोर रहा तो महंगाई और कृषि कर्ज के डिफाल्ट का खतरा बढ़ जाएगा। कर्ज समाधान कंपनी CLXNS ने वित्तीय संस्थानों और नीति निर्धारकों को एग्रीकल्चर लोन डिफाल्ट की आशंका को लेकर आगाह किया है। कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में किसानों के लिए ब्याज माफी, कर्ज अदागयी की अवधि बढ़ाने और लोन रिस्ट्रक्चर करने जैसे कदम उठाने के सुझाव दिए हैं।

साल 2001 से 2020 बीच सात वर्ष अल नीनो प्रभाव वाले रहे हैं। इस वर्षों में खरीफ उत्पादन में 3 से 16 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई थी। पिछले दिनों आरबीआई ने भी मानसून पर अल नीनो के प्रभाव को लेकर चिंताएं व्यक्त की थी।

बढ़ सकती है महंगाई

मानसून की धीमी शुरुआत का असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। सरकार के महंगाई पर अंकुश लगाने की कोशिशों के बावजूद कृषि वस्तुओं के दाम मजबूत बने हुए हैं। जब तक मानसून जोर नहीं पकड़ता है, महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद कम है। ऐसे में सरकार के सामने किसानों को मौसम की मार से बचाने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने की दोहरी चुनौती है।

इस सप्ताह जोर पकड़ेगा मानसून

मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन-चार दिनों में मानसून जोर पकड़ सकता है। मानसून के आगे बढ़ने की स्थितियां बन रही हैं। दक्षिण, मध्य और पश्चिमी राज्यों के धान, सोयाबीन, कपास और गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों में बारिश की संभावना है। उत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्रों में अगले दो-तीन दिनों में बारिश का अनुमान है। देश का बड़ा भू-भाग हीटवेव की चपेट में है। बारिश से इसमें राहत मिलने की उम्मीद है।

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