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गेहूं उत्पादक किसानों के लिए सरकार की एडवाइजरी, शीतलहर में फसल का इन तरीकों से रखें ध्यान

गेहूं उत्पादन में बढ़ोतरी के बीच कृषि मंत्रालय ने शीतलहर को देखते हुए गेहूं उत्पादक किसानों को सलाह जारी की है। इसके तहत किसानों को गेहूं की बुआई के 40-45 दिन बाद तक नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग पूरा करना चाहिए। इससे फसल की अच्छी ग्रोथ होती है। वहीं जिन किसानों ने देरी से गेहूं की बुवाई की है और उनके खेत में संकरी और चौड़ी पत्ते वाले खरपतावर दिखाई दे रहे हैं, तो उन्हें शाकनाशी का इस्तेमाल करना चाहिए। जबकि, पाला प्रबंधन के लिए मौसम विभाग के पूर्वानुमान को ध्यान रखते हुए गेहूं की हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने 20-30 जनवरी के दौरान भारत के पूर्वोत्तर और मध्य क्षेत्रों में बारिश की भविष्यवाणी की है।

क्या दी सलाह

कृषि मंत्रालय की सालह के अनुसार बेहतर उत्पादन के लिए गेहूं की फसल की सिंचाई से ठीक पहले खेत में यूरिया डाले। वहीं, जिन किसानों ने देरी से गेहूं की बुवाई की है और उनके खेत में संकरी और चौड़ी पत्ते वाखे खरपतावर दिखाई दे रहे हैं, तो उन्हें शाकनाशी का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके तहत शाकनाशी सल्फोसल्फ्यूरॉन 75WG को लगभग 13.5 ग्राम प्रति एकड़ या सल्फोसल्फ्यूरॉन प्लस मेट्सल्फ्यूरॉन 16 ग्राम को 120-150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में छिड़काव करना चाहिए। वहीं अगर किसान चाहें, तो पहली सिंचाई से पहले या सिंचाई के 10-15 दिन बाद स्प्रे कर सकते हैं।

पीला रतुआ रोग से बचाव का तरीका

वहीं मंत्रालय पीला रतुआ रोग के लिए अनुकूल आर्द्र मौसम को ध्यान में रखते हुए, किसानों को सलाह दी है कि वे पीला रतुआ के मामले सामने आने पर नियमित रूप से अपनी फसलों का निरीक्षण करें। अगर कोई पौधा पीला रतुआ रोग से संक्रमित दिख रहा है, तो उसे खेत से बाहर निकाल दें। इससे संक्रमण दूसरे पौधों तक नहीं फैलेगा। इसी तरह पाला से बचने के लिए मौसम विभाग के पूर्वानुमान को ध्यान रखते हुए गेहूं की हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने 20-30 जनवरी के दौरान भारत के पूर्वोत्तर और मध्य क्षेत्रों में बारिश की भविष्यवाणी की है और आगामी सप्ताह में तापमान सामान्य से नीचे जाने की उम्मीद है।

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