fbpx
Connect with us

Hi, what are you looking for?

संघर्ष

अजय चौटाला पर टिकैत बंधुओं को क्यों देनी पड़ी सफाई?

बाबा टिकैत की जयंती पर सिसौली में अजय चौटाला को बुलाकर घिरी भाकियू

किसान नेता चौ. महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती पर गत 6 अक्टूबर को सिसौली में आयोजित कार्यक्रम में जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के अध्यक्ष और हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के पिता अजय सिंह चौटाला की मौजूदगी पर विवाद खड़ा हो गया है। इस अवसर पर अजय चौटाला ने ताऊ देवीलाल की याद में एक पुस्तकालय का उद्घाटन भी किया था, जिस पर तमाम सवाल उठ रहे हैं।

हरियाणा की भाजपा सरकार में भागीदार दुष्यंत चौटाला और उनके पिता को लेकर किसान आंदोलन के समय से ही आंदोलनकारियों में नाराजगी है। सिसौली के किसान भवन में बाबा टिकैत की जयंती पर अजय चौटाला को देखकर किसान नेताओं में विरोध के स्वर उभरने लगे। खासतौर पर हरियाणा के किसान नेताओं ने सिसौली में अजय चौटाला की मौजूदगी और उनके द्वारा पुस्तकालय के उद्घाटन पर सवाल उठाये। बताया जाता है कि हरियाणा के नाराज किसानों ने पुस्तकालय के पत्थर से अजय चौटाला का नाम उखाड़ दिया। भाकियू के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए पत्थर पर दोबारा अजय चौटाला का नाम लिखवाया।

इस विवाद ने भारतीय किसान यूनियन के सर्वेसर्वा नरेश टिकैत और राकेश टिकैत को असमंजस में डाल दिया है। बाबा टिकैत की जयंती के कार्यक्रम में अजय सिंह चौटाला को खास मेहमान बनाने का बचाव करना टिकैत बंधुओं के लिए मुश्किल हो रहा है। सोशल मीडिया पर लोग खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

विवाद बढ़ने के बाद भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत को सफाई देनी पड़ी। नरेश टिकैत की ओर से जारी वीडियो संदेश में उन्होंने चौटाला परिवार से चार पीढ़ियों के पारिवारिक संबंध का हवाला देते हुए सिसौली में अजय चौटाला को बुलाने का बचाव किया।

इसके बाद भी विवाद नहीं थमा तो भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी और किसानों को व्यर्थ के विवादों में ना उलझने की सलाह दी है।

यह सारा विवाद भारतीय किसान यूनियन के सियासी संबंधों को लेकर खड़ा हुआ है। कृषि कानूनों के खिलाफ साल भर चले किसान आंदोलन के दौरान किसान संगठनों ने भाजपा और उसके सहयोगी दलों का जमकर विरोध किया था। इस दौरान भाजपा शासित राज्यों में किसानों पर हजारों मुकदमें दर्ज हुए और लखीमपुर खीरी जैसा कांड हुआ। तभी से भाजपा व सहयोगी दलों के प्रति आंदोलनकारी किसानों में नाराजगी का भाव है। यही वजह है कि पंजाब में अकाली दल और राजस्थान में हनुमान बेनीवाल की आरएलपी को भाजपा से नाता तोड़ना पड़ा था।

किसान आंदोलन के दौरान राकेश टिकैत किसानों के प्रमुख नेता बनकर उभरे। लेकिन अब अचानक सिसौली में अजय चौटाला की उपस्थिति ने किसान यूनियन के भीतर और बाहर हलचल मचा दी है। खासकर किसान आंदोलन से जुड़े किसानों को भाकियू के गढ़ सिसौली में अजय चौटाला की खास मेहमान के तौर उपस्थिति अखर रही है।

संबंधित पोस्ट

खेती

पहले सूखे ने बेहाल किया और अब फसलों पर बेमौसम बारिश की मार। एक तरफ कटने को तैयार फसलें पानी में डूबी हैं तो...

संघर्ष

चौ. अजित सिंह के सत्ता से दूर होने के बावजूद किसानों में एक अहसास का था कि दिल्ली में उनका कोई है। राजनीतिक नुकसान...

संघर्ष

पिछले चुनाव में मात्र एक सीट जीतने वाली रालोद यूपी चुनाव में गेमचेंजर की भूमिका में आ गई है। किसान राजनीति के बूते जयंत...

संघर्ष

दुनिया को खबर देने वाले पत्रकार रमन कश्यप की मौत की जानकारी उसके परिजनों को 9-10 घंटे बाद मिली, लिंचिंग के दावों को पिता...