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सिख किसानों के मुद्दे पर हरसिमरत कौर ने योगी को लगाया फोन



देश के बंटवारे के बाद उत्तर प्रदेश के बिजनौर, रामपुर और लखीमपुर खीरी जिलों में जाकर बसे हजारों किसानों पर जमीन से बेदखल होने का खतरा मंडरा रहा है। इन किसानों में बड़ी तादाद सिखों की है, जिसके चलते इस मुद्दे ने पंजाब की राजनीति में हलचल मचा दी है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह से बात करने का भरोसा दिलाया है तो भाजपा के सहयोगी शिरोमणी अकाली दल ने आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है। आम आदमी पार्टी भी इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने में जुट गई है क्योंकि मामला हजारों किसानों की रोजी-रोजी और जमीन से जुड़ा है।

इस बीच, शिरोमणी अकाली दल की सांसद और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने सिख किसानों को जमीन से बेदखल किए जाने के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की है। उनका कहना है कि योगी जी ने किसानों के साथ किसी तरह का अन्याय न होने देने का भरोसा दिलाया है। जल्द की अकाली दल का एक प्रतिनिधिमंडल भी यूपी के मुख्यमंत्री से मिलेगा।

इस मामले पर किसान संगठन भी हरकत में आ गए हैं। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) के संयोजक सरदार वीएम सिंह ने बताया कि जमीनी हकीकत जानने के लिए AIKSCC की तरफ से तीन सदस्यों की एक समिति गठित की गई है जो प्रभावित किसानों से मुलाकात कर हफ्ते भर में अपनी रिपोर्ट देगी। इस समिति की अध्यक्षता सरदार तेजिंदर सिंह करेंगे।

वीएम सिंह का कहना है कि इस मामले को बेवजह धर्म से जोड़ा जा रहा है जबकि प्रभावित किसानों में सभी धर्मों के किसान हैं। मुद्दा यह है कि कई पीढ़ियों से यूपी में बसे किसानों को उनकी जमीन से बेदखल की कोशिश की जा रही है, जिसका विरोध किया जाएगा।

क्या है बिजनौर का मामला?  

आजादी के बाद बहुत से किसान पश्चिमी यूपी और तराई के इलाकों में जाकर बस गए थे। इन किसानों ने अपनी मेहतन के दम पर जंगल से सटे इलाकों को खेती के लायक बनाया। लेकिन जमीन के मालिकाना हक पर विवाद और वन विभाग के दावे के चलते अब इन किसानों पर विस्थापन की तलवार लटक रही है। सरकार की नजर में ये किसान अवैध कब्जेदार हैं।  

इस मुद्दे  को उठाने वाले सिक्ख संगठन के अध्यख जसवीर सिंह विर्क ने बताया कि बिजनौर जिले की नगीना तहसील के चंपतपुर गांव में 1948 से 1951 के बीच कुछ सिख परिवार आकर बसे थे। पिछले करीब 70 साल से बिजनौर में बसे इन किसानों की तीसरी-चौथी पीढ़ी खेती कर रही है। इन किसानों को नलकूप और बिजली कनेक्शन भी जारी हुए हैं। यूपी सरकार इन्हें जमीन से बेदखल कर शायद कोई आर्म्ड फोर्स  सेंटर बनवाना चाहती है।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन से जुड़े अदित चौधरी का कहना है कि बिजनौर में किसानों को जमीन से बेदखल करने की सुगबुगाहट से किसानों में भय और चिंता का माहौल है। कोराना और रोजगार संकट के बीच अब किसानों को जमीन से हाथ धोने का डर सता रहा है।             

लखमीपुर खीरी और रामपुर में क्या हुआ?

सिक्ख संगठन यूपी के अध्यक्ष जसवीर सिंह विर्क बताते हैं कि रामपुर की स्वार तहसील और लखीमपुर खीरी की निघासन तहसील के रननगर गांव में सैकड़ों किसान परिवार आजादी के बाद आकर बसे थे। इन किसानों ने राजा विक्रम शाह से जमीन खरीदी थी, लेकिन उसकी कोई लिखा-पढ़ी नहीं हुई। सन 1966 में जब सीलिंग की कार्रवाई शुरू हुई तो उक्त जमीन को वन विभाग की जमीन के तौर पर दर्ज किया गया, लेकिन वहां किसान खेती करते रहे। 1980 में चकबंदी के दौरान इन किसानों की खतौनियां तो बनी लेकिन सरकार की नजर में यह वन विभाग की जमीन थी। इस बीच यह मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा जहां निर्णय किसानों के पक्ष में नहीं आया। फिलहाल रननगर में करीब 400 परिवार खेती करते हैं।

जमीन से बेदखल होने के कगार पर लखीमपुर खीरी जिले के रननगर गांव के हरबंत सिंह व अन्य किसान जिन पर
जमीन से बेदखल होने के कगार पर लखीमपुर खीरी जिले के रननगर गांव के हरबंत सिंह व अन्य किसान

जमीन से बेदखल होने की चिंता में डूबे रननगर के किसान हरबंत सिंह का कहना है कि इस इलाके को उनके पुरखों ने बसाया और कड़ी मेहनत से खेती के लायक बनाया। अब किसानों की तीसरी-चौथी पीढ़ी यहां खेती कर रही है। लेकिन गत 5 जून को वन विभाग और पुलिस की टीम जेसीबी लेकर गन्ने की खड़ी फसल उजाड़ने पहुंच गई और कई एकड़ में फसल तबाह कर दी। सिक्ख संगठन के गुरमीत सिंह रंधावा का कहना है कि यहां किसानों की तीन से ज्यादा पीढ़ियों खेती करती आ रही हैं फिर भी सरकार इन्हें जमीन से बेदखल करना चाहती है। यहां तक कि कोरोना जैसे संकट के बीच वन विभाग की टीम खड़ी फसल को रौंदने पहुंच गई।

मिली जानकारी के मुताबिक, रननगर में जमीन का कब्जा लेने पहुंची वन विभाग और पुलिस की टीम को किसानों के विरोध के चलते वापस लौटना पड़ा। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। इस मामले में 250 से ज्यादा लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।

पंजाब की सियासत में हलचल

अगर यह मामला सिर्फ यूपी तक सीमित होता तो शायद उतना बड़ा मुद्दा नहीं बनता। लेकिन सिक्ख संगठन के दखल के बाद इसकी गूंज पंजाब में भी सुनाई देने लगी है। शिरोमणी अकाली दल के नेता प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस यूपी में सिख किसानों के साथ अन्याय न होने देने का दावा किया है। वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने इस मुद्दे पर भाजपा और अकाली को घेरना शुरू कर दिया है। मान का कहना है कि आज जो उत्तर प्रदेश में हो रहा है, ठीक वैसा ही गुजरात के कच्छ में सिख किसानों के साथ हो चुका है। अकाली दल को सत्ता का मोह छोड़कर किसानों के साथ खड़ा होना चाहिए।

हालांकि, किसानों से जमीन वापस लेने को लेकर राज्य सरकार के रुख की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री और अकाली दल के नेताओं ने जिस तरह इस मुद्दे को उठाया है, उससे किसानों की हिम्मत जरूर बंधी है।