बुधवार, 21 अप्रैल 2021
मेरा गांव

रेल रोकी, यात्रियों पर फूल बरसायें, चाय पिलाई और समय पर ट्रैक खाली कर दिये


https://twitter.com/amaanbali
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ऐसे शांतिपूर्ण आंदोलन असफल करार दिये जाते हैं। फिर सफल आंदोलन कैसा होता है?

आज किसानों के रेल रोको अभियान के साथ भी ऐसा ही हुआ। ज्यादातर रेलगाड़ियों की आवाजाही सामान्य रहने के दावे को प्रदर्शन की नाकामी के तौर पर पेश किया जा रहा है। जबकि पंजाब में कई महीनों तक रेल ठप रहने पर किसान आंदोलन की खूब आलोचना हुई थी। इस बार रेलगाड़ियों को लंबे समय तक नहीं रोका गया। न कोई तोड़फोड़ हुई और न ही यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रेल रोकने का प्रयास करने वाले कई आंदोलनकारियों को बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में पुलिस ने हिरासत में जरूर लिया। लेकिन इस दौरान किसी हिसंक घटना की जानकारी नहीं है। कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर आंदोलन शांतिपूर्ण रहा।

आज संयुक्त किसान मोर्चा का रेल रोको आंदोलन कितना सफल या कितना असफल रहा, यह देखने के नजरिये पर निर्भर करता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि आंदोलन का असर कई राज्यों में दिखा। कई जगह महिलाओं ने नेतृत्व किया। दिन भर रेल लाइनों पर किसानों के जमावड़े की तस्वीरें आती रही। कहीं रेल यात्रियों पर फूल बरसाये गये तो कहीं यात्रियों को चाय-पानी पिलाकर आंदोलनकारियों ने उन तक अपने मुद्दे पहुंचाने की कोशिश की। कहीं जलेबियां बंट रही थी, तो कहीं आंदोलन के गीतों पर किसान झूम रहे थे।

क्या यह सब सफल आंदोलन के पैमाने पर खरा नहीं उतरता है? देश में सैकड़ों जगह कृषि कानूनों के विरोध में किसान इकट्ठा हुए। अपना विरोध व्यक्त किया और समय से ट्रैक खाली कर दिये। क्या किसी आंदोलन के सफल होने के लिए कुछ बड़ा होना जरूरी है? कोई बड़ा बवाल या हल्ला? तभी आंदोलन को सफल माना जाएगा?

आज के रेल रोको अभियान का सबसे ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा में देखने को मिला। पंजाब के बठिंडा में हजारों की तादाद में किसानों ने रेल की पटरियों पर डेरा जमा लिया। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं। लेकिन यह आंदोलन पंजाब तक सीमित नहीं था।

हरियाणा की जींद में भी महिलाओं ने बढ़-चढ़कर रेल रोको अभियान में हिस्सा लिया। हरियाणा के अंबाला, कुरुक्षेत्र और चरखी दादरी में भी किसानों ने रेल की पटरियों पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।

इस दौरान बिहार के पटना, झारखंड के रांची, यूपी के कानपुर, उरई, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, मध्यप्रदेश के विदिशा, महाराष्ट्र के औरंगाबाद, बुलढाणा और कर्नाटक के रायचूर समेत कई जगहों से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। यूपी के कई जिलों में आंदोलनकारियों को रोकने और नज़रबंद किये जाने की खबर है। कई जगह प्रदर्शनकारी रेल की पटरियों पर ही लेट गये, जिन्हें हटाने के लिए पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी। इस रेल रोको आंदोलन में किसान यूनियनों के साथ विपक्षी दल भी शामिल थे।

रेल रोकने का कार्यक्रम सुबह 12 से 4 बजे तक था। चार बजते ही प्रदर्शनकारी रेलवे ट्रैक से हटने लगे थे। बेशक, रेल रोको अभियान का असर हरियाणा और पंजाब में सबसे ज्यादा दिखा। लेकिन देश के बाकी राज्यों खासकर पश्चिमी बंगाल, बिहार, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में भी किसानों ने अपने नजदीकी रेलवे स्टेशनों पर पहुंचकर विरोध-प्रदर्शन किया। इस लिहाज से इसे देशव्यापी कहा जा सकता है। दोपहर 12 बजते ही विभिन्न राज्यों से आंदोलनकारी किसानों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाने लगी थीं।

राजस्थान के जयपुर में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी रेलवे ट्रैक पर जुटे और रेलगाड़ियों की आवाजाही बंद करा दी। बंगाल और ओडिशा में भी कई जगह प्रदर्शन हुए।

रेल रोको अभियान के कई रंग-ढंग काफी निराले रहे। लुधियाना में एक रेल यात्री को चाय पिलाते किसान की यह तस्वीर काफी वायरल हो रही है।

हरियाणा के चरखी दादरी स्टेशन पर आंदोलनकारी महिलाओं ने प्रदर्शन के दौरान जलेबी और पकौड़े का वितरण किया तो कहीं महिलाओं ने नाच-गाकर विरोध दर्ज कराया।

कई जगह आंदोलनकारियों ने ट्रेन के ड्राइवर और यात्रियों का फूल-मालाओं से स्वागत भी किया।

यूपी के शामिली में रेलवे ट्रैक पर डेरा जमाये किसान आंदोलन के गीतों पर थिरकते नजर आये।

भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां का कहना है कि पंजाब के 15 जिलों में 20 जगहों पर रेल रोकी गई। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। हरियाणा और पंजाब के विरोध-प्रदर्शनों में महिलाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं।

यूपी के मोदीनगर और हापुड़ में किसानों ने रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर विरोध-प्रदर्शन किया। यूपी में मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, गढ़ मुक्तेश्वर, हापुड़ और दनकौर में किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने रेल की पटरियों पर बैठकर धरना दिया।

भारतीय रेल की ओर से आए बयान के अनुसार, रेल रोको अभियान का रेलगाड़ियों की आवाजाही पर बहुत कम असर पड़ा है। इस दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। कुछ इलाकों में रेलगाड़ियों को रोका गया था, लेकिन जल्द ही आवागमन सामान्य हो गया। विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए 25 ट्रेनों के समय या रुट में बदलाव किया गया था।

संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि राष्ट्रव्यापी रेल रोको आंदोलन के तहत देश भर के सैकड़ों स्थानों पर दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक ट्रेनों को रोका गया। देश भर में ये कार्यक्रम सफल रहे व कोई हिंसक गतिविधि नहीं हुई। देश भर के किसान एमएसपी की कानूनी गारंटी के लिए, तीन कृषि कानून, विद्युत विधेयक व प्रदूषण विधेयक के खिलाफ लगभग तीन महीने से आंदोलन कर रहे हैं। किसानों में गुस्सा तेज हो रहा है। केंद्र सरकार को कानून को रद्द करने होंगे।