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आ गया मानसून, मगर सरकार ने खारिज किया स्काइमेट का दावा



इस साल मानसून को लेकर विचित्र स्थिति पैदा हो गई है। भारत सरकार का मौसम विभाग और देश की प्रमुख मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काइमेंट मानसून को लेकर अलग-अलग दावें कर रहे हैं।

स्काइमेट के अनुसार, मानसून 30 मई को केरल पहुंच चुका है। बंगाल की खाड़ी में उठे सुपर साइक्लोन अंपन के बावजूद मानसून ने दो दिन पहले ही केरल में दस्तक दे दी। राज्य में कई जगह बारिश शुरू हो चुकी है। स्काइमेट ने केरल समेत पश्चिमी तटों पर भारी बारिश की संभावना जताई है।

उधर, केंद्र सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. राजीवन ने मानसून के केरल पहुंचने की खबर को गलत करार दिया है। उनका कहना है कि मानसून अभी केरल नहीं पहुंचा। मौसम विभाग के मुताबिक, एक जून से मानसून के केरल पहुंचने की स्थितियां बन जाएंगी। मौसम विभाग पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत काम करता है।

इस साल स्काइमेट ने मानसून के समय से पहले 28 मई को केरल पहुुंचने की संभावना जताई थी। कंपनी ने इसमें 2 दिन का एरर मार्जिन दिया है। जबकि मौसम विभाग ने मानसून के सामान्य रहने का अनुमान देते हुए 1 जून को केरल पहुंचने की उम्मीद जताई थी।

स्काइमेट मुताबिक, मानसून आगमन की घोषणा के लिए कुछ तय मापदंड होते हैं। इन मापदण्डों में भूमध्य रेखा के उत्तर में यानी भारत की तरफ वायुमंडलीय स्थितियों में बदलाव और लक्षद्वीप, केरल तथा कर्नाटक में बारिश प्रमुख हैं। ये सभी मापदंड पूर्ण हो रहे हैं। खासतौर पर बारिश, आउटगोइंग लॉन्गवेव रेडिएशन (ओएलआर) वैल्यू और वायुगति उस स्थिति में पहुंच चुकी हैं जब मानसून के आगमन की घोषणा की जा सके।

स्काइमेट के अनुसार, मुंबई और उपनगरीय इलाकों में 2 से 4 जून के बीच अच्छी बारिश होने के आसार हैं। इस दौरान कोंकण गोवा के तटीय भागों में भारी बारिश की भी संभावना है।

हाल के वर्षों में कई बार मौसम विभाग की बजाय प्राइवेट कंपनी का अनुमान सही निकला। यही वजह है कि मौसम पूर्वानुमान सरकारी विभाग और प्राइवेट एजेंसी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। हालांकि, सरकारी विभाग होने केे नाते अंतत: मौसम विभाग की बात ही आधिकारिक मानी जाएगी।