बुधवार, 21 अप्रैल 2021
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अफ्रीकी दाल खाएगा इंडिया, मोजांबिक से 2 लाख टन अरहर आयात को मंजूरी



भारत और मोजांबिक के बीच हुए समझौते के तहत इस साल दो लाख टन अरहर दाल के आयात को मंजूरी

आत्मनिर्भरता के दावों के बीच भारत सरकार ने अफ्रीकी देश मोजांबिक से दो लाख टन अरहर दाल के आयात की अनुमति दी है। यह आयात किस प्रकार और किन बंदरगाहों के जरिये होगी यह भी निर्धारित किया गया है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाले विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) ने मोजांबिक से अरहर दाल के आयात की अनुमति का पब्लिक नोटिस जारी किया है। 19 मार्च, 2021 को जारी इस नोटिस के अनुसार, भारत सरकार ने वर्ष 2021-22 में मोजांबिक से 2 लाख टन अरहर दाल के आयात की अनुमति देने का फैसला किया है। यह निर्णय भारत और मोजांबिक के बीच हुए समझौते के तहत लिया गया है। अरहर का आयात केवल 5 बंदरगाहों – मुंबई, तूतीकोरिन, चेन्नई, कोलकाता और हजीरा के जरिये हो सकेगा।   

केंद्र सरकार ने मोजांबिक से 2 लाख टन अरहर के आयात को मंजूरी देने का फैसला ऐसे समय लिया है जब देश में किसान आंदोलन चल रहा है और न्यूनतम समर्थनम मूल्य (एमएसपी) के कानूनी अधिकार की मांग उठ रही है। कृषि जिंसों से जुड़े व्यापार के जानकार आरएस राणा का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अरहर की कीमतों को देखते हुए भारतीय बंदरगाहों तक अरहर का आयात 6,000 रुपये प्रति कुंतल के एमएसपी से कम नहीं बैठेगा। जबकि देश के कई इलाकों में किसानों को अरहर का एमएसपी भी नहीं मिल पा रहा है।

योगेंद्र यादव के नेतृत्व में जय किसान आंदोलन किसानों से एमएसपी पर खरीद नहीं होने का मुद्दा उठा रहा है। इसे एमएसपी लूट कैटकुलेटर का नाम दिया है, जिसमेें एमएसपी न मिलने से किसानों को होने वाले नुकसान का अनुमान लगाया जाता है। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि लाखों टन दालों का आयात करने वाले देश अपने किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य क्यों नहीं दिला पा रहा है।

आरएस राणा का मानना है कि अगर देश के किसानों को एमएसपी की गारंटी दी जाए तो दालों का आयात करने की बजाय देश में ही दलहन उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। लेकिन भारत सरकार ने देश में दालों की कमी दूर करने के लिए पांच साल तक मोजांबिक से अरहर के आयात का समझौता कर लिया है।  

अरहर के आयात की अनुमति के संबंध में डीजीएफटी की ओर से जारी पब्लिक नोटिस