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दिल्ली पहुंच गया टिड्डी दल, खुद की पीठ थपथपाती रही सरकार



एनसीआर तक टिड्डियों की दस्तक से चेतावनी प्रणाली और सरकारी तंत्र पर उठने लगे सवाल

पिछले कई महीने से मंडरा रहा टिड्डियों का खतरा राजधानी दिल्ली और आसपास के जिलों तक पहुंच गया है। शनिवार को दिल्ली से सटे गुरुग्राम के आकाश में टिड्डियों की तादाद देखकर लोगों के होश उड़ गए। टिड्डियों का यह दल कई किलोमीटर लंबा-चौड़ा था। इन्हें भगाने के लिए लोगों के पास थाली, ताली बजाने के अलावा कोई उपाय नहीं था। गुरुग्राम और दक्षिणी दिल्ली से टिड्डियों का दल यूपी की तरफ मुड़ चुका है। इसे देखते हुए दिल्ली और यूपी के कई जिलों को अलर्ट कर दिया है। फिलहाल देश के 7 राज्य राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब टिड्डी दल के हमलों से जूझ रहे हैं।

कृषि मंत्रालय की ओर से दी जानकारी के मुताबिक, राजस्थान के झुंझुनूं में एक टिड्डी दल को नियंत्रित किया गया था जो शुक्रवार को हरियाणा के रेवाड़ी पहुंच गया। शनिवार सुबह झज्जर पहुंचने के बाद टिड्डियों का यह दल तीन-चार हिस्सों में बंट गया। इनमें से एक टिड्डी दल हरियाणा के नूंह पहुंचा और दो झुंड गुरुग्राम होते हुए यूपी की तरफ निकल गए।

लेकिन दो दिन से झुंझुनूं और रेवाड़ी में टिड्डी नियंत्रण की कोशिशों के बावजूद किसी को अंदाजा नहीं था कि एक दिन में टिड्डियां दिल्ली-एनसीआर तक पहुंच जाएंगी। इसे सरकार की चेतावनी प्रणाली में बड़ी खामी माना जा रहा है कि कई किलोमीटर लंबे-चौड़े टिड्डी दल का पता क्यों नहीं चल पाया।

राजधानी दिल्ली तक पहुंचे टिड्डियों के प्रकोप के बाद विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सवाल उठाया कि 6 महीने पहले से जानकारी होने के बावजूद सरकार ने कोई तैयारी क्यों नहीं की? उनका कहना है कि अगर वक्त रहते कारगर कदम उठाए जाते तो किसानों को नुकसान नहीं उठाना पड़ता। हुड्डा ने गिरदावरी करवाकर किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।

चेतावनी की बजाय वाहवाही

इस साल 20 जनवरी को खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की चेतावनी के बाद से ही देश में टिड्डियों के हमले की आशंका जताई जा रही थी। लेकिन राजस्थान में टिड्डी दलों के नए हमले के बावजूद पिछले एक सप्ताह से केंद्र सरकार के मंत्री और अधिकारी टिड्डियों की रोकथाम के लिए खुद ही अपनी पीठ थपथपा रहे थे।

गत 21 जून को नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने टिड्डियों की रोकथाम में तकनीक के शानदार इस्तेमाल के लिए कृषि मंत्रालय को बधाई दी थी। इस बारे में अमिताभ कांत के मुताबिक, ड्रोन के इस्तेमाल ने बेहतरीन परिणाम दिए हैं। यह मेक इन इंडिया की पहल थी जिसका फायदा किसानों को मिल रहा है।

इससे पहले विदेश राज्यमंत्री वी. मुरलीधरन ने टिड्डियों पर रोकथाम के लिए कृषि मंत्रालय की प्रशंसा करते हुए ट्वीट किया था कि मोदी सरकार ने समय रहते विदेश से स्प्रेयर मंगाए और किसानों की फसलों को बचा लिया।

इस बीच, राजस्थान में जब टिड्डियों का नया हमला जोर पकड़ रहा था, तब कृषि मंत्रालय ने 23 जून को विज्ञप्ति जारी कर खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) से मिली सराहना और कीट नियंत्रण में ड्रोन व देसी-विदेशी मशीनों के इस्तेमाल का खूब बखान किया। मतलब, जब नए इलाकों में टिड्डियों के हमले के अलर्ट जारी होने चाहिए थे, तब कृषि मंत्रालय ड्रोन के गुणगान और एफएओ से मिली प्रशंसा का प्रचार-प्रसार कर रहा था।

इससे पहले 21 जून को कृषि मंत्रालय ने 7 राज्यों के 1.14 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में टिड्डियों की रोकथाम करने का दावा किया था। सवाल उठता है कि इतने बड़े क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण के बावजूद दिल्ली तक हमले की भनक क्यों नहीं लगी? अब राजस्थान ही नहीं बल्कि हरियाणा और यूपी के कई जिलों तक टिड्डियों का प्रकोप पहुंच चुका है।

कीट नियंत्रण के सरकारी दावों के बावजूद नए हरियाणा और यूपी में टिड्डियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। बड़े पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली इन टिड्डियों के कारण कोरोना संकट में किसानों की मुश्किल बढ़ रही हैं।

गुरुग्राम से यूपी पहुंचा टिड्डी दल

आज गुरुग्राम से यूपी पहुंची टिड्डियों के बारे में कृषि मंत्रालय का कहना है कि सभी टिड्डी दलों पर केंद्र और राज्य सरकारों की टीमें नजर बनाए हुए हैं। इनकी रोकथाम के पूरे उपाय किए जा रहे हैं। इस काम में 60 टीमें, 12 ड्रोन और कई फायर टेंडर लगेे हैं। यूपी में 5 अतिरिक्त टीम राजस्थान से भेजी गई हैं। हरियाणा में भी दो टीमें टिड्डियों को काबू में करने का प्रयास कर रही हैं।