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साल भर में ही गुटबाजी का शिकार डीडी किसान, नरेश सिरोही बाहर



साल भर में ही आंतरिक गुटबाजी का शिकार हुआ किसान चैनल। सलाहकार पद से किसान नेता नरेश सिरोही को हटाया गया।

नई दिल्‍ली। कृषि मंत्रालय से संजीव बालियान और ग्रामीण विकास मंत्रालय से चौधरी बीरेंद्र सिंह की विदाई के बाद भाजपा के एक और जाट नेता को झटका लगा है। डीडी किसान चैनल के सलाहकार नरेश सिरोही की सेवाएं अचानक समाप्‍त कर दी गई हैं। सिरोही भाजपा किसान मोर्चा के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष रहे हैं और चैनल की लांचिंग के वक्‍त से ही अहम भूमिका निभा रहे थे। काफी समय से डीडी किसान में आंतरिक गुटबाजी और खींचतान की खबरें आ रही थीं। जिसका नतीजा सिरोही की विदाई के तौर पर सामने आया है।

यूपी चुनाव के मद्देनजर उम्‍मीद की जा रही थी कि भाजपा जाट नेताओं को तवज्‍जो देगी लेकिन बालियान और सिरोही के मामले में उल्‍टा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, गत 11 जुलाई को डीडी किसान से नरेश सिरोही की सेवाएं तत्‍काल प्रभाव से समाप्‍त करने का आदेश जारी हुआ है। वह चैनल लांच करने वाली स्‍टैरिंग कमेटी के सदस्‍य थे। सिरोही ने देश के तकरीबन हरेक जिले में डीडी किसान मॉनिटरों को नियुक्त किया था। इन नियुक्तियों को बाद में दूरदर्शन के आला अधिकारियों ने रद्द कर दिया था। तभी चैनल में सिरोही के घटते कद और अंदरुनी गुटबाज़ी का अंदाजा होने लगा था।

माना जा रहा है कि डीडी किसान से नरेश सिरोही की विदाई के पीछे प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्यप्रकाश के साथ उनका तालमेल न बन पाना और चैनल मॉनिटरों की नियुक्ति का मामला प्रमुख वजह बना। असलीभारत.कॉम से बातचीत में सिरोही ने बताया कि उन्होंने चैनल को निजी हाथों में सौंपने या किसी प्राइवेट चैनल से चैनल हेड लाने की कोशिशों का विरोध किया। जिसका खामियाजा उन्हें भुगतान पड़ा। उन्होंने चैनल में कई गलत लोगों की भर्तियों पर भी सवाल उठाए थे।

सिरोही का दावा है कि किसान मॉनिटरों की नियुक्ति प्रसार भारती के आला अधिकारियों की मंजूरी से की गई थी और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं हुई। बल्कि इन मॉनिटरों ने चैनल को लोकप्रिय बनाने के लिए काफी मेहनत की। ये मॉनिटर अवैतनिक थे।

सिरोही ने जेटली से की थी सूर्यप्रकाश की शिकायत

पिछले महीने नरेश सिरोही ने डीडी किसान में चल रही गड़बड़ि‍यों की शिकायत तत्‍कालीन सूचना प्रसारण मंत्री अरुण जेटली से कर दी थी। मिली जानकारी के अनुसार, जेटली को लिखे पत्र में उन्‍होंने चैनल के अाला अधिकारियों के साथ-साथ प्रसार भारती के चेेयरमैन ए. सूर्यप्रकाश पर भी सवाल उठाए थे। संभवत: सिरोही का यही पत्र उनकी विदाई की वजह बना।

किसान चैनल साल भर में ही आंतरिक राजनीति का शिकार

केंद्र की सत्‍ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले किसान चैनल का वादा निभाया था। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद सबसे पहले जिन लोगों की नियुक्ति हुई उनमें नरेश सिरोही का नाम प्रमुख था। लेकिन साल भर में ही किसान चैनल आंतरिक राजनीति का शिकार हो गया है। नरेश सिरोही की बर्खास्‍तगी के बाद यह गुटबाजी और तेज हो सकती है। चैनल की गुणवत्‍ता और टीआरपी को लेकर भी तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं।