कृषि व्यापार

11 फीसदी घट सकता है चीनी उत्‍पादन



क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा का अनुमान है कि पेराई वर्ष 2015-16 में घरेलू चीनी उत्‍पादन 11 फीसदी घटकर 252 लाख टन रह सकता है।

नई दिल्‍ली। पिछले कई वर्षों में गन्‍ना मूल्‍य में हुई मामूली वृद्ध‍ि और भुगतान में देरी का असर देश में चीनी उत्‍पादन पर भी पड़ रहा है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा का अनुमान है कि पेराई वर्ष 2015-16 में घरेलू चीनी उत्‍पादन 11 फीसदी घटकर 252 लाख टन रह सकता है। गौरतलब है कि देश के प्रमुख गन्‍ना उत्‍पादन राज्‍य उत्‍तर प्रदेश में किसानों का गन्‍ने से मोहभंग होना शुरू हो गया है। इसका असर गन्‍ने की खेती और चीनी उत्‍पादन पर पड़ना तय है।

बकाया भुगतान और उचित मूल्‍य के लिए गन्‍ना किसानों को आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में चीनी की कीमत सुधरने से गन्‍ने किसानों को बेहतर दाम मिलने की आस जगी है। कई राज्‍यों में सूखे के हालात, चीनी के निर्यात और अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में चीनी की कमी के चलते पिछले साल अगस्‍त से चीनी के दाम बढ़ रहे हैं।

इससे पहले भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने आगामी पेराई सत्र में चीनी उत्‍पादन 4 प्रतिशत घटकर करीब 240 लाख टन रह जाने की संभावना जताई थी।