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भयंकर कृषि संकट का सामना कर रहे हैं गांव


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इंटरनैशनल फूड पाॅलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट बता रही है कि गांवों के कृषि संकट से खाद्य सुरक्षा खतरे में आ सकता है

इंटरनैशनल फूड पाॅलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें इस संस्था ने बताया है कि दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों के गांव भयंकर कृषि संकट का सामना कर रहे हैं। संस्था ने यह भी कहा है कि अगर स्थितियों को नहीं सुधारा गया तो इससे और भी कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

संस्था ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों के ग्रामीण इलाकों की स्थिति और वहां के भयंकर कृषि संकट का अध्ययन करके बताया है कि इस वजह से इन क्षेत्रों में भूखमरी, कुपोषण, गरीबी और बेरोजगारी जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। साथ ही पर्यावरण को लेकर भी नए तरह की चुनौतियां पैदा हो रही हैं।

इस रिपोर्ट में इस स्थिति के खतरों से भी पूरी दुनिया को आगाह करने की कोशिश की गई है। रिपोर्ट मंे बताया गया है कि अगर स्थिति को नहीं सुधारा गया तो दुनिया की खाद्य सुरक्षा खतरे में आएगी। इसके अलावा सतत विकास लक्ष्यों को 2030 तक हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर स्थितियों में सुधार नहीं लाया गया तो पेरिस समझौते के लक्ष्यों को भी हासिल करना मुश्किल हो जाएगा।

इस रिपोर्ट में अफ्रीका, भारत और चीन के ग्रामीण इलाकों के संकट की खास तौर पर चर्चा की गई है और कहा गया है कि इन क्षेत्रों के शहरी इलाकों में जो सुविधाएं हैं, उनके मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में काफी कम सुविधाएं हैं। चीन के ग्रामीण इलाके पर्यावरण से संबंधित समस्याओं से जूझ रहे हैं। वहीं अफ्रीका के ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी बड़ी समस्या है। जबकि भारत के ग्रामीण इलाकों में कृषि संकट कई और समस्याओं के मूल में है।

अब भी गांवों में सबसे ज्यादा गरीब लोग रहते हैं। पूरी दुनिया की आबादी में गांवों की हिस्सेदारी 45.3 प्रतिशत है। जबकि दुनिया के 70 फीसदी गरीब लोग गांवों में ही रहते हैं। शहरी इलाकों में गरीबी की दर सात फीसदी है। जबकि गांवों के लिए यह आंकड़ा वैश्विक स्तर पर 17 फीसदी का है।

समाधान की राह सुझाते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण इलाकों पर खास जोर देते हुए उनका विकास करने की जरूरत है। नीतिगत मामलों में ग्रामीण इलाकों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण विकास को व्यापक दायरे में देखने की जरूरत है।

रिपोर्ट में नीति निर्धारकों को संबोधित करते हुए कहा गया है कि उन्हें यह भी देखने की जरूरत है कि अगर गांवों का विकास होगा तो इससे पूरी अर्थव्यवस्था आगे बढ़ेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी, वैश्विक विकास लक्ष्यों को हासिल किया जा सकेगा और पर्यावरण संरक्षण संबंधित लक्ष्यों को पूरा करना भी आसान होगा।

इस रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि समस्या के समाधान के लिए गांवों और शहरों की अर्थव्यवस्थाओं को आपस में जोड़ना होगा। इससे कृषि और गैर-कृषि क्षेत्र में सामंजस्य बनेगा और इसका असर न सिर्फ आर्थिक स्तर पर पड़ेगा बल्कि सामाजिक जीवन में भी इससे सुधार होगा।

इस रिपोर्ट में ग्रामीण इलाकों की स्थिति में सुधार के लिए पांच उपाय अलग से बताए गए हैं। ये उपाय हैंः गांवों में कृषि और गैर-कृषि रोजगार सृजन, लैंगिक समानता, पर्यावरण चुनौतियों का समाधान, उर्जा स्रोतों तक पहुंच में सुधार और सुशासन में निवेश। जाहिर है कि अगर इन मोर्चो पर काम होता है तो इससे न पूरी दुनिया के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदल सकती है।

इस रिपोर्ट में पहली बार कुछ अच्छे प्रयोगों के बारे में भी बताया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे यूरोप के कुछ देशों ने अपने यहां के गांवों को संकट को दूर करने का सफल प्रयोग किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन प्रयोगों में से कुछ बातें दुनिया के वैसे देश अपनी जरूरत के हिसाब से अपना सकते हैं, जहां के ग्रामीण क्षेत्र संकटों का सामना कर रहे हैं।

  • प्रियंका राय