एग्री बिजनेस

देश के सबसे बड़े डेयरी ब्रांड अमूल के स्वामित्व वाली गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) खाद्य तेलों के बाजार में भी आ गई है। इसकी शुरुआत फिलहाल गुजरात से हुई है जहां जीसीएमएमएफ तिलहन किसानों की मदद करेगी। संस्था ने जन्मेय ब्रांड के तहत मूंगफली, सूरजमुखी, सरसों, सोयाबीन और बिनौला तेल बाजार में उतारे हैं, जो संस्था के रिटेल नेटवर्क के जरिए बेचे जाएंगे।

दुनिया भर में अमूल के कोऑपरेटिव मॉडल को सराहा जाता है क्योंकि इसकी आय का अधिकांश हिस्सा पशुपालकों को जाता है। जीसीएमएमएफ के प्रबंध निदेशक आरएस सोढ़ी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रेरित आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत गुजरात के तिलहन किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए जन्मेय ब्रांड के खाद्य तेलों की शुरुआत की गई है। आरएस सोढ़ी ने असलीभारत.कॉम को बताया कि खाद्य तेलों का बाजार संस्था के लिए नया क्षेत्र है और इसके अनुभवों को देखने के बाद ही नेशनल लेवल पर लॉन्चिंग का फैसला किया जाएगा।

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गौरतलब है कि भारत विश्व में सबसे ज्यादा खाद्य तेल आयात करने वाला देश है जो अपनी जरूरत का 65-70 फीसदी खाद्य तेल आयात करता है। अभी जून के महीने में ही खाद्य तेलों का आयात 8 फीसदी बढ़कर 8 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा है। देश को आत्मनिर्भर बनाने और व्यापार घाटा कम करने के लिए खाद्य तेलों के आयात पर अंकुश लगाना जरूरी है।

अमूल को चलाने वाली सहकारी संस्था की एंट्री से खाद्य तेलों के बाजार में हलचल मच सकती है। हालांकि, नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) से जुड़ी मदर डेयरी लंबे समय से धारा ब्रांड के साथ खाद्य तेलों के बाजार में मौजूद है। गुजरात में जीसीएमएमएफ को दूध बेचने वाले ज्यादातर पशुपालक तिलहन के किसान भी हैं, इसलिए इन्हें संगठित संस्था के लिए करना आसान होगा।


- असलीभारत. टीम     ·   12 अक्टूबर, 2018 -->