मेरा देश

सिंगुर फैसला: किसानों को बिना मुआवजा लौटाए वापस मिलेगी जमीन

8315108274_2d041e1884
किसान विरोधी भूमि-अधिग्रहण नीतियों को पश्चिम बंगाल में बड़ा झटका लगा है। टाटा मोटर्स के लिए सिंगुर में हुए भूमि अधिग्रहण को सुुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। साल 2006 में बुद्धदेव भट्टाचार्य की वामपंथी सरकार ने टाटा के नैनो प्रोजेक्‍ट के लिए एक हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। हालांकि, मामले के तूल पकड़ने और किसानों के भारी विरोध के चलते टाटा मोटर्स को अपना प्‍लांट गुजरात के साणंद में शिफ्ट करना पड़ा। लेकिन जमीन का मामला सुप्रीम कोर्ट में था। 
आज सुप्रीम कोर्ट ने सिंगुर में हुए भूमि अधिग्रहण को पब्लिक परपज यानी जनहित में नहीं माना और टाटा मोटर्स को 12 हफ्तों के अंदर किसानों को जमीन वापस लौटाने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि किसी कंप‍नी के लिए सरकार की ओर से भूमि अधिग्रहण ‘जन उद्देश्य’ नहीं माना जाएगा। फैसले की खास बात यह है कि किसानों को उनकी जमीन तो वापस मिलेगी लेकिन उनसे मुआवजा वापस नहीं लिया जाएगा। अदालत का मानना है कि ये किसान पिछले 10 वर्षों से अपनी जमीन से वंचित है इसलिए उन्‍हें मिला मुआवजा वापस नहीं लिया जाना चाहिए। सिंगुर के किसानों के साथ-साथ यह ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के लिए भी बड़ी कामयाबी है। ममता बनर्जी ने ही सिंगुर को लेकर आंदोलन छेड़ा था जो बंगाल से वामपंथी सरकार की विदाई का कारण बना।  

प्राइवेट कंपनी के लिए भूमि अधिग्रहण ‘जन उद्देश्य’ नहीं!

सिंगुर मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला भूमि अधिग्रहण से जुड़े कई अन्‍य मामलों में भी नज़ीर बन सकता है जहां सरकारें जनहित के नाम पर प्राइवेट कंपनियों के लिए भूमि अधिग्रहण करती हैं। हाईवे, रियल एस्‍टेट और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर से जुड़ी परियोजनाओं में ‘जन उद्देश्य’ के नाम पर होने वाले भूमि अधिग्रहण का फायदा निजी कंपनियां उठा जाती हैं। लेकिन अब ऐसे मामलों में कमी आने की उम्‍मीद जगी है। 
सिंगुर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि किसी कंपनी के कार प्‍लांट के लिए किसानों से भूमि अधिग्रहण पब्लिक परपज के दायरे में नहीं आता है। यह अधिग्रहण निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए हुआ था। गौरतलब है कि इस मामले में टाटा मोटर्स को राहत देते हुए कोलकाता हाईकोर्ट ने अधिग्रहण को सही ठहराया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश से न सिर्फ टाटा मोटर्स को झटका लगा है बल्कि मार्क्‍सवादी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी (सीपीएम) के लिए स्थिति और भी असहज हो गई है। सिंगुर आंदोलन के बाद ही ममता बनर्जी बंगाल की राजनीति में सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरींं जबकि वामपंथी दलों की सियासी जमीन लगातार खिसक रही है। 

सिंगुर भूमि अधिग्रहण में कई खामियां 

सुप्रीम कोर्ट ने टाटा मोटर्स की नैनो परियोजना के लिए सिंगुर में हुए भूमि अधिग्रहण में कई खामियां पायी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि किसानों की आपत्तियों और शिकायतों की सही तरीके से जांच नहीं हुई। गैर-कानूनी तरीके से किसानों की जमीन लेने को लेकर अदालत ने तत्‍कालीन वामपंथी सरकार और टाटा मोटर्स को फटकार भी लगाई। 

यह किसानों की जीत है: ममता बनर्जी 

सिंगुर पर सर्वोच्‍च अदालत के फैसले को पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐतिहासिक निर्णय और किसानों की जीत बताया है। एक पत्रकार वार्ता में उन्‍होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय को किस तरह लागू किया जाए,  इस पर विचार करने के लिए कल एक रणनीतिक बैठक होगी। किसानों को जमीन लौटाने के लिए एक व्यवस्था बनाने पर काम करेंगे।

 

 

Facebook Comments

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*