खेत-खलियान

कैसे उठाएंं प्रधानमंत्री बीमा योजना का फायदा? क्‍या हैं दिक्‍कतें?

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करीब चार महीने पहले किसानों को प्रकृति की मार और अचानक होने वाले नुकसान से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का ऐलान किया था। इस खरीफ सीजन से किसानों को इस नई योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। लगातार दो साल से सूखे की मार झेल रहे किसानों को बेसब्री से इस योजना का इंतजार है। योजना के बारे में व्‍यापक प्रचार-प्रसार के बावजूद अभी भी बहुत-से किसानों को जानकारी नहीं है कि फसल बीमा कैसे कराएं और क्‍लेम कैसे मिलेगा?

नई योजना में क्‍या है नया? 

  • पुरानी फसल बीमा योजनाओं में किसानों को 15 फीसदी तक प्रीमियम देना पड़ता था लेकिन नई बीमा योजना में किसानों के लिए प्रीमियम की राशि महज डेढ से 2 फीसदी रखी गई है। बागवानी फसलों के लिए किसानों को 5 फीसदी प्रीमियम देना होगा। बीमा का बाकी खर्च केंद्र और राज्‍य सरकारें मिलकर वहन करेंगी।

  • सरकारी सब्सिडी पर कोई ऊपरी सीमा नहीं है। भले ही शेष प्रीमियम 90% हो, यह सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। पुरानी बीमा योजनाओं में सरकारी सब्सिडी की ऊपरी सीमा तय होती थी। जिसके चलते नुकसान की पूरी भरपाई नहीं हो पाती थी। नई स्कीम में बीमित राशि का पूरा क्‍लेम मिल सकेगा।

  • अभी तक देश में करीब 23 फीसदी किसान ही फसल बीमा के दायरे में आ पाए हैं। सरकार ने इस साल कम से कम 50 फीसदी किसानों तक फसल बीमा पहुंचाने का लक्ष्‍य रखा है।

-बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों के लिए फसल बीमा अनिवार्य है। यानी बैंक से कर्ज लेने वाले किसानों का बीमा बैंकों के जरिये हो जाएगा। लेकिन जिन किसानों ने बैंकों से कर्ज नहीं लिया, उन्‍हें बीमा के दायरे में लाने सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

– ओलाबारी, जलभराव और भू-स्‍खलन जैसी आपदाओं को स्थानीय आपदा माना जाएगा। स्थानीय आपदाओं और फसल कटाई के बाद नुकसान के मामले में किसान को इकाई मानकर नुकसान का आकलन किया जाएगा।

किस तरह के नुकसान कवर होंगे

बुवाई/रोपण में रोक संबंधित जोखिम: कम बारिश या प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण बुवाई/ रोपण में उत्पन्न रोक।

खड़ी फसल (बुवाई से कटाई तक के लिए): सूखा, अकाल, बाढ़, सैलाब, कीट एवं रोग, भूस्खलन, प्राकृतिक आग और बिजली, तूफान, ओले, चक्रवात, आंधी, टेम्पेस्ट, तूफान और बवंडर आदि के कारण उपज के नुकसान।

कटाई के उपरांत नुकसान: नई बीमा योजना में फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान की भरपाई हो पाएगी। अगर फसल कटाई के 14 दिन तक यदि चक्रवात, चक्रवाती बारिश और बेमौसम बारिश से उपज को नुकसान पहुंचता है तो किसान को बीमा क्‍लेम मिल सकता है।

स्थानीय आपदायें: अधिसूचित क्षेत्र में मूसलधार बारिश, भूस्खलन और बाढ़ जैसे स्थानीय जोखिम से खेतों को हानि/क्षति।

बीमा कराने पर कितना खर्च आएगा 

उदाहरण के तौर पर, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 30 हजार का बीमा कराने पर अगर प्रीमियम 22 प्रतिशत तय किया गया है तो किसान 600 रुपए प्रीमियम देगा और सरकार 6000 हजार रुपए का प्रीमियम देगी। शत-प्रतिशत नुकसान की दशा में किसान को 30 हजार रुपए की पूरी दावा राशि प्राप्त होगी।

-अगर किसी ग्राम पंचायत में 75 फीसदी किसान बुवाई नहीं कर पाएं तो योजना के तहत बीमित राशि का 25 फीसदी भुगतान मिलेगा।

25 फीसदी राशि तुरंत खातों में पहुंचााने का दावा 

सरकार का दावा है कि बीमा क्‍लेम के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। प्राकृतिक आपदा के बाद 25 फीसदी राशि किसान के खाते में तुरंत पहुंचेगीी जबकि बाकी भुगतान नुकसान के आकलन के बाद किया जाएगा।

किन किसानों को मिलेगा बीमा का लाभ?

सभी पट्टेदार/ जोतदार किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ मिल सकता है। योजना के तहत पंजीकरण कराने के लिए किसानों कों भूमि रिकॉर्ड अधिकार (आरओआर), भूमि कब्जा प्रमाण पत्र (एल पी सी) आदि आवश्यक दस्तावेजी प्रस्तुत करने होंगे।

गैर ऋणी किसानों के लिए यह योजना वैकल्पिक होगी।

कैसे कराएं फसल बीमा?

कृषि ऋण लेने वाले किसानों का बीमा उनके बैंक के जरिये होगा। जिन किसानों ने बैंक से कर्ज नहीं लिया है वे भी नोडल बैंक या भारतीय कृषि बीमा कंपनी (एआईसी) के स्‍थानीय प्रतिनिधि अथवा संबंधित पंचायत सचिव, ब्‍लाॅक के कृषि विकास अधिकारी या जिला कृषि अधिकारी के माध्‍यम से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अपना पंजीकरण करा सकते हैं।

भारत सरकार ने किसानों तक बीमा योजना को पहुंचाने के लिए एक बीमा पोर्टल भी शुरू किया है। जिसका वेब पता  है http://www.agri-insurance.gov.in/Farmer_Details.aspx

इसके अलावा एक एंड्रॉयड आधारित “फसल बीमा ऐप्प” भी शुरू किया गया है जो फसल बीमा, कृषि सहयोग और किसान कल्याण विभाग (डीएसी एवं परिवार कल्याण) की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है।

फसल बीमा कराने के लिए जरुरी दस्‍तावेज?

-सरकारी पहचान-पत्र

-निवास प्रमाण-पत्र

-खसरा/खाता संख्या की प्रमाणित प्रति (बोये गए क्षेत्र के दस्तावेज़)

-बैंक खाता संख्या और रद्द किया गया चेक (बैंक विवरण के लिए)

  • एक हस्ताक्षरित भरा हुआ प्रस्ताव फॉर्म

फसल बीमा की पूरी प्रकिया ऑनलाइन होने और स्‍थानीय स्‍तर पर कर्मचारियों की कमी के चलते किसानों को फसल बीमा करवाने में कई तरह की दिक्‍कतें आ रही हैं। जनधन खाते खोलने के लिए बैंकों ने जिस प्रकार अभियान चलाए, वैसे तत्‍परता फसल बीमा को लेकर देखने में नहीं आ रही है।

फसल बीमा में असल दिक्‍कतें क्‍लेम लेते वक्‍त आनी शुरू होंगे। तभी नई योजना की खूबियां और खामियां पूरी तरह उजागर होंगी।

 

 

 

 

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